कोविड- 19 में लगे एक-तिहाई मेडिकल स्टाफ को इंसोम्निया की बीमारी

काइट्री में प्रकाशित स्टडी में पाया गया कि, चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे ज्यादा होने के समय कोविड- 19 के इलाज में लगे एक-तिहाई मेडिकल स्टाफ को इंसोम्निया की बीमारी पाई गई।

स्टडी के लिए 29 जनवरी से 3 फरवरी के समय जब चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे ज्यादा था, तब वीचैट नाम के सोशल मैसेजिंग ऐप पर 1563 प्रतिभागियों से एक सेल्फ-एडमिनिस्टर्ड प्रश्नावली पूछी गई। इन 1563 प्रतिभागियों में डॉक्टर और नर्स, वार्ड बॉय आदि अन्य मेडिकल स्टाफ भी शामिल था। अध्ययन के दौरान सामने आया कि, 564 प्रतिभागियों यानी 36.1 प्रतिशत लोगों में इंसोम्निया के लक्षण देखे गए।

स्टडी के सह-लेखक प्रोफेसर बीन झांग के मुताबिक, ‘इंसोम्निया की बीमारी सामान्य रूप से कम समय तक परेशान करती है। लेकिन, कोविड- 19 जैसे वर्तमान संकट के लंबे समय तक चलने की वजह से यह मेडिकल स्टाफ में क्रोनिक इंसोम्निया का रूप ले सकती है, जो कि काफी चिंताजनक स्थिति होगी।‘

इस स्टडी में सामने आए परिणाम 2002 में सार्स की वजह से नर्सों में देखे गए इंसोम्निया के परिणाम के बराबर ही हैं। उस अध्ययन में, सार्स के मरीजों की वजह से 37 प्रतिशत नर्सों में इंसोम्निया की समस्या देखी गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि, किसी हेल्थ वर्कर की कोविड- 19 संक्रमण के कारण मौत होने के बाद की जाने वाली स्टडी के परिणाम और भी खतरनाक हो सकते हैं।

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