जानिए शिव ने क्यों लिया काल भैरव अवतार, पढ़े पूरी खबर

आपको बता दे शिव महापुराण के मुताबिक एक बार श्री हरि विष्णु ने ब्रह्मा जी से पूछा कि इस सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ रचनाकार कौन हैं इसके जवाब में ब्रह्मा ने स्वयं का ना लिया। इस दौरान ब्रह्मा जी की वाणी अहंकार युक्त थी। जिससे ​श्री विष्णु क्रोधित हो गए। तब वे दोनों अपने प्रश्न का उत्तर जानने के लिए चारों वेदों के पास गए। सभीने उनको बताया कि शिव ही सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ रचनाकार हैं। चारों वेदों के उत्तर सुनकर ब्रह्मा और श्री विष्णु जोर जोर से हंसने लगे।

इस दौरान ब्रह्मा का अहंकार और बढ़ गया। तभी शिव दिव्य ज्योतिष स्वरूप प्रकट हुए। शिव को देखकर ब्रह्मा जी अत्यंत क्रोधित हो उठे, उनका पांचवा सिर क्रोध से तप रहा था। तब शिव काल स्वरूप में प्रकट हुए जो कालभैरव के नाम से जाना जाता हैं कालभैरव ने ब्रह्मा जी के पांचवे सिर को धड़ से अलग कर दिया। वही ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए शिव ने भैरव को सभी तीर्थों के दर्शन करने को कहा।

वही शिवपुराण के मुताबिक एक बार देवी मां पार्वती शिव से पूछती हैं कि कलियुग में समस्त पापों को दूर करने के लिए किस मंत्र का आशय लेना चाहिए। देवी मां के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए भगवान शिव कहते हैं कि प्रलय काल में जब सृष्टि में सब समाप्त हो गया था। तब मेरी आज्ञा से समस्त वेद और शास्त्र पंचाक्षर में विलीन हो गए थे।

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