क्‍या आपको पता है लिफ्ट में क्‍यों लगाया जाता है आइना

आज का जमाना बेहद ही आधुनिक हो गया है यही कारण है कि चाहे शहर बड़ा हो या छोटा बहुमंजिला इमारतों की ढ़ेर दिखाई देती है। वहीं अगर बड़े शहरों की बात करें तो 100 से भी ज़्यादा मंजिल की इमारतें देखने को मिल जाएंगी। बता दें कि मुंबई में वर्ल्ड 1 नाम की बिल्डिंग में 117 फ्लोर हैं। अब आप भी सोच रहे होंगे कि हम गगनचुंबी इमारतों की बात क्यों कर रहे हैं, तो आपको बता दें कि हम उन बिल्डिंगों की बात कर रहे हैं जिसमें लिफ्ट की सुविधा रहती है। जी हां हम उन्‍ही लिफ्ट की बात कर रहे हैं जो , वही लिफ्ट जो देखते ही देखते भूतल से टॉप फ्लोर तक पहुंचा देती है। आप भी अब तक हज़ारों बार लिफ्ट में गए होंगे। आपने ये भी देखा होगा कि ज़्यादातर लिफ्ट में आपके लिए शीशे भी लगाए गए होते हैं।

वहीं कई बार आपके मन में ये सवाल भी आता होगा कि आखिर लिफ्ट में शीशा क्यों लगा होता है। लेकिन अफसोस की आपको इसका जवाब नहीं मिल पाता होगा आज हम आपके इस सवाल का जवाब देने जा रहे है। आपको बताएंगे कि भला लिफ्ट में शीशे की क्‍या जरूरत है? जैसा कि हमें लगता हैं तो ये कोई मुश्किल सवाल नहीं है अगर आपने कभी भी जरा सा भी ध्‍यान दिया होगा तो आपको इसका जवाब अपने आप मिल जाता। वैसे कोई बात नहीं अगर आपको इस बारे में नहीं पता तो हम आप तक ये जानकारी दे देते हें।

दरअसल आपने देखा होगा कि कई बार बड़े बड़े बिल्‍डिंगों में कई बार ऐसा होता है कि हमें 20वीं या 30वीं मंजिल पर जाना होता है, जिसमें लिफ्ट आमतौर पर 1 मिनट का समय ले लेती हैं। इसके अलावा जब लिफ्ट बीच के फ्लोर पर रुकती हुई आती हैं, तो इसमें और भी समय लग जाता है। जिससे लोगों को काफी बोरियत का सामना करना पड़ता है और उन्‍हें महसूस होता है कि लिफ्ट में काफी टाइम वेस्ट होता है। बेशक लिफ्ट चाहे जितनी भी लेट हो, वह आपको सीढ़ियों से जल्दी ही पहुंचा देगी। इतना ही नहीं इसके साथ ही कई बार तो लोगों को लिफ्ट में जाने से भी डर लगता है कि कहीं इसमें कोई ऐसी खराबी न आ जाए, जिससे उनकी जान खतरे में पड़े।

उन लोगों के इसी डर के कारण और सोच को लेकर लिफ्ट बनाने वाले इंजीनियर्स का सिरदर्द बढ़ गया। जरा सोचिए इतनी बड़ी खोज करने वाले इंजीनियर्स भी इस बात से परेशान हो गए की आखिर लोगों के इस डर और सोच को कैसे खत्‍म किया जाए तो आपको बता दें कि इसे खत्‍म करने के लिए उनमें से एक इंजीनियर्स ने एक बार फिर से अपना दिमाग दौड़ाया और उसकी एक तरकीब ने सभी इंजीनियर्स का सिरदर्द चुटकियों में खत्‍म कर दिया जी हां क्‍योंकि कई इंजीनियर्स का मानना था कि लिफ्ट की स्पीड में बढ़ोतरी की जानी चाहिए, लेकिन उस बंदे ने कहा कि लिफ्ट की स्पीड बढ़ाने की कोई ज़रूरत नहीं है।

जबकि उस इंजीनीयर ने कहा कि यदि लिफ्ट में शीशा लगा दिया जाए तो लोग उसमें अपनी शक्ल देखने के साथ-साथ खुद को सजाने-संवारने में लग जाएंगे और जब लोग ऐसे में बीजी हो जाएंगे तो उन्हें लिफ्ट द्वारा लिए जाने वाले समय का भी ज़्यादा ध्यान नहीं रहेगा। फिर क्‍या था सभी ने उसके इस आइडिया को स्‍वीकार किया और फिर एक ट्रायल किया जो कि एकदम सफल हो गया।

जिसके बाद देखते ही देखते दुनिया के कोने-कोने में ज़्यादातर लिफ्ट में लोगों के लिए शीशे लगा दिए गए और अब हर जगह लोग इस सुविधा का आराम से फायदा भी उठाने लगे। जो लोगों के लिए भी आरामदेह साबित हुआ और कई फ्लोर वाली बिल्‍डिंगे भी आसानी से बनने लगी।

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