रोज़ देसी घी खाने के फ़ायदे व नुक़सान क्या हैं?

हजारों सालों से घी हमारे रसोई घर में अपनी एक खास जगह बनाए हुए है | यह न सिर्फ खाने को स्वादिष्ट बनाता है बल्कि अपने गुणों के कारण कई बिमारियों के इलाज में भी उपयुक्त है|

आयुर्वेद के अनुसार घी रसायन है | आयुर्वेद में गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे ८ पशुओं के दूध से बने घी के गुण बताये गए है | लेकिन खाने के लिए गाय और भैंस के घी का ही इस्तेमाल होता है | गाय का घी पचने में हल्का और मनुष्यों के लिए अधिक उपयुक्त होता है | इसमें कुछ पीला पन दिखाई देता है जब की भैंस का घी ज्यादा सफेद और पचने में भारी होता है | इसलिए खाने में और चिकित्सा में भी गाय का घी श्रेष्ठ माना गया है | घी में शॉर्ट चेन फैटी एसिड होने से यह आसानी से पचता है | घी का स्मोक पॉइंट 250 ° सेल्सियस होता है जिसके कारण यह गर्म करने पर फ्री रैडिकल्स में नहीं टूट पाता | इसीलिये आयुर्वेद में खाना पकाने और औषधियों के निर्माण में घी के इस्तेमाल का सुझाव दिया है |

सुबह १ चम्मच घी गर्म पानी के साथ ही ले और इसे लेने के बाद कम से कम आधा घंटा कुछ और न खाये |

सुबह रोजाना खाली पेट १ चम्मच गाय का घी लेना बहोत सारे फायदे पहुँचाता है :

ग्लोइंग त्वचा : घी रसायन होने से कोशिकाओं को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है जिससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है और वो स्वस्थ होती है। घी स्निग्ध होने से त्वचा की नेचुरल नमीं बनाये रखता है और उसे ड्राई होने से भी बचाता है।

मोटापा घटाए : देसी घी मोटापा नहीं बढ़ता। बल्कि रोजाना १ चम्‍मच देसी घी खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म बढ़ेगा और वजन अपने आप ही कम होगा।

दर्द में राहत : घी स्निग्ध होने से एक बेहतरीन नैचुरल ल्‍यूब्रिकेंट है | इसके नियमित सेवन से जोड़ों और ऊतकों में आवश्यक चिकनाई बनी रहती है। आयुर्वेद के अनुसार, वात बढ़ने से जोड़ों की तकलीफे दिखाई देती है | घी वात कम करके जोड़ों के दर्द और ऐंठन से राहत देता है। घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से छुटकारा दिला सकता है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करें : सुबह खाली पेट घी का सेवन करना कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित रखता है। घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है। यह हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार करता है। कई शोधकर्ताओं ने रुग्णों पर किये गए परीक्षणों मे इस की पुष्टि की है |

दिमाग को करे तेज : आयुर्वेद में घी को मेध्य रसायन याने दिमाग की लिए उपयुक्त बताया है | घी में मौजूद वसा कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करती है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन भी अधिक होता है जो मेमोरी को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसलिए आयुर्वेद की मस्तिष्क पर काम करनेवाली औषधीयाँ ज़्यादातर घी में बनाई गयी है | आधुनिक शोधकर्ताओं ने भी इस बात को अपने परीक्षणों में सही पाया है |

आँखों के लिए फायदेमंद : घी में प्रचुर मात्रा में विटामिन ए और कैरोटिनॉइड एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है |

रोगप्रतिकार शक्ति को बढ़ाता है घी

एक रिसर्च में पाया गया है की घी में स्थित butyric acid हमारे इम्यून सिस्टम के टी सेल्स के उत्पादन की प्रक्रिया को बढ़ती है |

बालों के स्वास्थ्य को बढ़ाता है घी – इसमें स्थित विटामिन ए बालों को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है जिससे बल घने, मुलायम बनते है |

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