रात को पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोना चाहिए,जानिए

अगर आप प्रकृति प्रेमी है तो आपको भी पेड़ पौधे पसंद होंगे. जिनके नीचे आप भी सोते होंगे या सोने की इक्छा करती होगी. अगर आप किसी शहर में रहते है तो पार्क ही ऐसी जगह होती है जहां कई सारे पेड़ होते है. दिन के समय पार्क में आप पेड़ के नीचे सोने का अनुभव ले सकते हैं.

बात करे गांव की यहां ज्यादातर लोग दिन में पेड़ के नीचे सोना पसंद करते हैं क्योंकि दिन के समय पेड़ के नीचे ठंडी ठंडी हवा चलती है. जो किसी कूलर की हवा से कम नहीं होती है. गांव में ज्यादातर लोग किसान होते है जिनका ज्यादातर समय खेत में बीतता है.

रात को पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोना चाहिए

आपको पता ही होगा गांव हो या शहर दिन में पेड़ के नीचे सोने या बैठने से कोई मना नहीं करता है. लेकिन जब बात रात की होती है रात में पेड़ के नीचे न सोने की हिदायत दी जाती है तो ऐसा क्यों है. अगर आप इसके पीछे का कारण नहीं जानते तो आपको इसके बारे में जरुर जानना चाहिए ताकि अगर कोई ऐसी गलती करता है तो आप उसे समझा सके.

पेड़ों में श्वसन क्रिया के लिए कोई विशेष अंग नहीं होता है. पेड़ अपनी पत्तियों में मौजूद छिद्रों से श्वसन क्रिया कर पाते हैं. इन छिद्रों को स्टोमेटा कहा जाता है. इसके अलावा कई पेड़ अपने तने और जड़ो में मौजूद छिद्रों से भी श्वसन क्रिया करते हैं. इस तरह इनमे लगातार श्वसन की क्रिया चलती रहती है.

हम सभी जानते है कि पेड़ पौधे दिन के समय प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से अपने लिए भोजन बनाते है. जिसमें यह प्रकाश, पानी, कार्बन डाईऑक्साइड का प्रयोग करते हैं. इससे ऑक्सीजन और ग्लूकोज बनता है. सुबह के समय सांस लेने से जो कार्बन डाई ऑक्साइड बनती है वह पत्तियों के अन्दर जमा हो जाती है.

ऐसे में जब दिन में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया चलती है तो इसमें पेड़ कार्बन डाई ऑक्साइड को अपने अन्दर ग्रहण करते है और इसका इस्तेमाल यह भोजन बनाने के लिए करते हैं. इस क्रिया में ऑक्सीजन का उत्सर्जन होता है. ऐसे में दिन के समय हमें पेड़ पौधों से ऑक्सीजन मिलती है. दिन में पेड़ के नीचे सोना काफी फायदेमंद होता है क्योंकि इससे हमें ताजी ऑक्सीजन मिलती है.

जहां तक रात की बात करे तो रात के समय ऐसा नहीं होता है. हालाकि श्वसन क्रिया लगातार चलती रहती है लेकिन रात में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बंद हो जाती है. ऐसे में ऑक्सीजन का निर्माण नहीं होता है. श्वसन क्रिया के लगातार चलते रहने से रात में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है और पेड़ कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन करने लगते हैं.

यहीं वजह है कि रात को पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए. दिन में जहां पेड़ों से ऑक्सीजन मिलती है वहीं रात के समय पेड़ों से कार्बन डाई ऑक्साइड मिलती है. ऐसी स्थिति में अगर आप रात के समय पेड़ के नीचे सोते है तो कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से व्यक्ति का दम घुटने लगता है. कई केस में तो व्यक्ति की मौत भी हो जाती है.

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