टॉयलेट सोप Vs बाथिंग बार में क्या अंतर है?

टॉयलेट सोप और बाथ सोप में फ़र्क़ है। यह ओर बात है कि इन्हें सामान्यतया एक ही माना जाता है।

कुछ नहाने के साबुनों को बाथ सोप कहने का कारण एक तकनीकी शब्द है, वो शब्द है उनकी टीएफएम वैल्यू (TFM- Total Fatty Matter – टोटल फ़ैटी मैटर)।

यह TFM वैल्यू ही निर्धारित करती है कि किस साबुन को टॉयलेट सोप कहा जाएगा ऐंव किस साबुन को बाथ सोप?

बाथ सोप की TFM वैल्यू, टॉयलेट सोप से काफ़ी कम होती है।

TFM की परिभाषा पर अपने आप में एक अलग विस्तृत जवाब लिख सकते हैं। पर इसे कम शब्दों में समेटने का प्रयास करूँगा।

टीएफएम (TFM)

साबुनों में TFM वैल्यू प्रतिशत में व्यक्त की जाती है। नहाने के किसी भी साबुन को ख़रीदने से पहले उसकी TFM वैल्यू जान लेनी चाहिए। यह साबुन की क्वॉलिटी बताता है।

भारत में ब्युरो ऑफ़ इंडीयन स्टैंडर्ड्स् (BIS – Bureau of Indian Standards) साबुनों की गुणवत्ता TFM में नापता है। TFM की तीन ग्रेड होती हैं।

76% या ऊपर वैल्यू वाले साबुन ग्रेड-1 यानी सर्वोच्च गुणवत्ता में रखे जाते हैं।
70% ऊपर वैल्यू वाले साबुन ग्रेड-2 यानी अच्छी गुणवत्ता में रखे जाते हैं।
60 % या ऊपर वैल्यू वाले साबुन ग्रेड-3 यानी मध्यम गुणवत्ता में रखे जाते हैं।
सामान्य शब्दों में ये जान लीजिए कि एक साबुन में TFM का प्रतिशत जितना ज़्यादा होता है वो शरीर की साफ़ सफ़ाई के साथ साथ, त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए उतना ही अच्छा माना जाता है। यह प्रतिशत साबुन पैकिंग के प्रष्ठ भाग पर अंकित होता है। उदाहरण के तौर पर सिन्थोल (Cinthol) साबुन के रैपर की तस्वीर देखते हैं, साबुन जिसकी TFM वैल्यू 79% है।

इसका साफ़ मतलब है कि सिन्थाॅल साबुन अपनी 79% TFM वैल्यू के कारण एक उच्च गुणवत्ता वाला साबुन है।

नीचे दिए गए चार्ट से जानते हैं कि TFM वैल्यू की रैंकिंग के हिसाब भारत के टॉप साबुन कौनसे हैं। ये सभी टॉयलेट सोप हैं।

मैसूर संडल साबुन 80% TFM वैल्यू के साथ भारतीय बाज़ार सबसे अच्छा साबुन है। उपरोक्त चार्ट में 60% TFM वैल्यू तक वाले साबुनों को जगह दी गयी है और हैरानी की बात है कि देश के कुछ इलाक़ों में सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध लाइफ़बाॅय साबुन इस लिस्ट में सबसे नीचे पायदान पर है।

और जिस नहाने के साबुन की TFM वैल्यू 60% से कम होती है, उसे बाथ सोप या बाथिंग बार कहा जाता है। अगर कोई कम्पनी अपने साबुन के रैपर पर बाथ सोप या बाथिंग बार लिख रही है तो उसे TMF वैल्यू लिखने की अनिवार्यता नहीं है, यह मान लिया जाता है कि वो 60% TMF वैल्यू से कम है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो सरकारी नियमों के अनुसार यह ज़रूरी है कि 60% TFM वैल्यू या इससे ऊपर वैल्यू के साबुनों को टॉयलेट सोप के तौर पर ही विज्ञापित किया जा सकता है, कोई भी कम्पनी इन्हें बाथ सोप लिख कर प्रचारित नहीं कर सकती है।

भारतीय बाज़ार में महज़ चंद साबुन ही बाथ सोप के तौर पर विज्ञापित किए जाते हैं।

डव साबुन ऐसा ही एक उत्पाद है। जो टॉयलेट सोप की श्रेणी में नहीं आता पर फिर भी वो विशेष तौर पर नहाने के साबुन के तौर पर विज्ञापित किया जाता है। आप देखेंगे कि डव की पैकिंग में सामने की तरफ़ ही “ब्यूटी बाथिंग बार” लिखा हुआ होता है।

इसका तात्पर्य यह हुआ कि डव साबुन की TFM वैल्यू 60% से कम है। डव कम्पनी का साबुन त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए तो अच्छा है, पर साफ़ सफ़ाई के लिए उतना उपयुक्त नहीं है। कम्पनी ने साबुन को मुख्यतः त्वचा की कोमलता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया है, और बहुत ही कम मात्रा में सफ़ाई के उदेश्य से बनाया है। अतः डव साबुन टॉयलेट सोप नहीं है और ना ही कम्पनी इसके टॉयलेट सोप होने का दावा कर सकती है।

पीयर्स कम्पनी का साबुन भी इसी श्रेणी में आता है। बाथ सोप में एक विशेष बात यह भी होती है कि यह अन्य नहाने की साबुनों की तुलना में जल्दी गलते हैं। डव और पीयर्स बाथिंग बार सिर्फ़ उन्हीं लोगों के लिए उपयुक्त हैं जिनकी त्वचा सूखी है। अन्य सभी लोगों को टॉयलेट सोप प्रयोग में लेना चाहिए जिसकी TFM वैल्यू अधिक हो।

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