आप भी कहते हैं- नाम में क्या रखा है? तो पढ़ें यह रोचक ​कथा

व्यक्ति का नाम रखने के पीछे क्या मनोविज्ञान होता है, यह समझने की बात होती है। नामकरण के जरिए व्यक्ति की एक पहचान होती है। नाम का प्रभाव उस व्यक्ति के जीवन में दिखे, इसलिए भी नामकरण किया जाता है। कई बार घटनाओं के आधार पर भी लोग बच्चों का नामकरण कर देते हैं। आपने लोगों को यह कहते हुए जरूर सुना होगा कि नाम में क्या रखा है? इससे संबंधित एक रोचक कथा है, जिसे आपको पढ़ा चाहिए।एक समय की बात है।

एक दंपत्ति को बेटा हुआ, तो उन्होंने भी अपने बच्चे के नामकरण के बारे में सोचा। सोच विचार के बाद उन लोगों ने बेटे का नाम पापक रख दिया। धीरे-धीरे जब बच्चा बड़ा हुआ तो उसे अपना नाम काफी खराब लगा। उसे पापक नाम पसंद नहीं था। एक दिन उसने अपने स्कूल के हेडमास्टर साहब से कहा कि वे उसका नाम बदल दें। यह नाम उसे ठीक नहीं लगता है। इस नाम के कारण उसे अपराध बोध होता है। उसके हेडमास्टर ने उसे समझाया कि नाम तो सिर्फ किसी को बुलाने के लिए होता है।

इससे वो चिंतित न हो। सबसे बड़ी बात नाम की नहीं, कर्म की होती है। हेडमास्टर साहब के लाख समझाने के बाद भी पापक को उनकी बात समझ नहीं आई और वो अपनी जिद पर अड़ा रहा। तब हेडमास्टर साहब ने कहा कि अच्छा, ठीक है। पहले तुम अपने लिए एक अच्छा सा नाम खोज लो। फिर आओ, तो तुम्हारा नाम बदल दिया जाएगा। यह बात जानकर पापक खुश हो गया।पापक अपने लिए एक अच्छे नाम की तलाश में निकला। रास्ते में एक शव यात्रा जा रही थी। उसने लोगों से पूछा कि किसका निधन हो गया है? लोगों ने कहा कि मरने वाले का नाम अमरपाल था। वह नाम सुनकर चौंक गया।

उसने सोचा कि नाम अमरपाल और उसकी मौत हो गई। फिर वह आगे बढ़ा। रास्ते में उसे एक भिखारी मिला। उसके मन में भिखारी का नाम जानने की उत्सुकता हुई। उसने भिखारी से पूछा कि क्या नाम है तुम्हारा? उसने अपना नाम धनपति बताया। पापक ने सोचा कि इसका नाम तो लखपति है और ये भीख मांग रहा है। नाम के विपरीत इसके कर्म हैं। पापक अपने लिए नए नाम की खोज में और आगे बढ़ा। उसे रास्ते में एक अंधा व्यक्ति मिला। उसने उससे उसका नाम पूछा। अंधे अपना नाम नैनसुख बताया। पापक ने सोचा कि नाम नैनसुख और यह अंधा है। ऐसे ही आगे बढ़ते हुए उसे एक व्यक्ति मिला, जो राह भटक गया था। वह लोगों से राह पूछ रहा था। तब पापक ने उसका नाम पूछा, तो उसने बताया कि उसका नाम पंथक है। इतना ​कुछ देखकर पापक सोचने लगा। ओह! पंथक भी राह भूल गया।अब उसकी समझ में आ गया था कि नाम में कुछ नहीं रखा होता है। उसका पापक नाम ही ठीक है। कर्म से ही व्यक्ति का पहचान होता है। उसका ही महत्व है। नाम तो बस कहने के लिए ही है।

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