करवा चौथ 2020 कब है, चांद निकलने का समय और शुभ मुहूर्त, जानिए

भारत में हिन्दू धर्म ग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों और धर्मशास्त्रों आदि के अनुसार प्रत्येक माह कोई ना कोई उपवास, कोई ना कोई त्योहार अथवा कोई ना कोई संस्कार आदि आता ही रहता है। लेकिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को जो उपवास किया जाता है उसका सुहागिन स्त्रियों के लिए बहुत अधिक महत्व होता है। दरसअल इस दिन को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि यदि इस दिन सुहागिन स्त्री अगर उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है। और उनका गृहस्थ जीवन सुख पूर्वक व्यतीत होता है। हालांकि पूरे भारत वर्ष में हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूमधाम से करवा चौथ के त्योहार को मनाते हैं। लेकिन उत्तर भारत में खास कर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि में इस दिन अलग ही नजारा होता है। करवा चौथ व्रत के दिन जहां दिन में कथाओं का दौर चलता है तो वहीं दूसरी ओर दिन ढलते ही विवाहिताओं की नजरें चांद के दीदार के लिए बेताब हो जाती हैं। चांद निकलने पर घरों की छतों का नजारा भी देखने लायक होता है। दरसअल सारा दिन पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखने के बाद आसमान के चमकते चांद का दीदार कर सुहागिन स्त्रियां अपने चांद के हाथों से निवाला खाकर अपना उपवास खोलती हैं।

करवा चौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले ही सुबह चार बजे के बाद शुरू हो जाता है। और रात को चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। और करवा चौथ व्रत की कथा सुनी जाती है।

मान्यताओं के अनुसार विवाह के उपरांत 12 वर्ष या 16 वर्ष तक लगातार करवा चौथ के इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के द्वारा किया जाता है। लेकिन अपनी इच्छा के अनुसार विवाहित महिलाएं इस करवा चौथ के व्रत को अपने जीवन भर भी रख सकती हैं। माना जाता है कि पति की लंबी उम्र के लिए इससे श्रेष्ठ कोई उपवास अथवा व्रत या अनुष्ठान आदि नहीं होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि शुभ मुहूर्त में पूजा पाठ करने से पति-पत्नी में प्रेम कई गुना बढ़ जाता है। सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ मिलता है।

वर्ष 2020 में करवा चौथ व्रत के दिन चांद निकलने का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त

वर्ष 2020 में करवा चौथ का व्रत 04 नवंबर 2020 दिन बुधवार के दिन रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त-शाम 05:29 बजे से लेकर शाम 06:48 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी मुहूर्त में आपको अपनी पूजा-पाठ करनी है।

चांद निकलने का समय- रात्रि 08:16 बजे चांद निकलेगा। इस बार चांद जल्दी ही निकल आएगा।

मान्यता है कि सबसे पहले यह व्रत शक्तिस्वरूपा माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ के लिए रखा था। इसी व्रत से उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई थी।

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