जानिए बच्चे के लिए बेड टाइम रूटीन के टिप्स

अधिक थकान होने पर शिशु को नींद आने में दिक्कत हो सकती है और वह चिड़चिड़ा हो सकता है। एक नियमित बेड टाइम रूटीन बनाने से शिशु का एक स्लीपिंग पैटर्न (सही समय पर सोने और उठने का नियम) बन जाएगा जिससे उसे सोने में समस्या नहीं होगी।

हर शिशु के सोने का समय और आदत अलग होती है। बच्चे का स्लीप रूटीन बनाने से पहले उसकी नींद पर अच्छे से नजर रखें। देखें कि आपका बच्चा कब सोता है और कितने समय के लिए सोता है। स्लीप रूटीन शिशु के सोने से आधे घंटे पहले का निश्चित करें। मान लीजिये कि आपका शिशु रात के 8:30 बजे सोता है, तो आप उसे सुलाना 8 बजे से शुरू करें।

एक ही दिन में सभी तरीके अपनाने की बजाय रोज एक अलग तरीका ट्राई करें। उदाहरण के लिए, एक दिन आप उसे लोरी गाकर सुलाएं तो किसी दिन हल्के हाथों से मालिश करें।

इस स्लीप रूटीन का मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि आपको तब तक शिशु के साथ रहना है जब तक वह सो न जाए। इसकी बजाय जब बच्चा उबासी लेने लगे तो आप उसे पालने में छोड़ दें ताकि वह स्वयं सो जाए। हो सकता है कि यह प्रक्रिया आपके शिशु के लिए काम न आए पर फिर भी आप इसे एक बार जरूर ट्राई करें। इस तरह से आपका बच्चा सोने के लिए आप पर निर्भर नहीं रहेगा।

हम में से अधिकतर लोग खुद भी इसी तरह सोते हैं। गर्म पानी से नहाने से त्वचा की रक्त वाहिकाएं खुल जाती हैं और शरीर को आराम मिलता है। शिशु को गर्म पानी से नहलाने या गर्म पानी में बिठा कर रखने से भी उसे रिलैक्स महसूस होता है।

कुछ बच्चों को नहाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है और यह उन्हें आराम देने की बजाय चिड़चिड़ा बना सकता है। अगर आपका बच्चा भी ऐसा ही है तो उस पर इस तरीके को न आजमाएं।

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