सिर्फ लोहे से कटने के बाद ही सेप्टिक क्यों होता है और टेटनेस का इंजेकशन क्यों लगाया जाता है ?

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। महत्वपूर्ण इसीलिए, क्योंकि यह प्रश्न एक गलत आम धारणा पर आधारित है, और यह हमे अक्सर ही सुनने को मिलता है तथा अक्सर ही पूछा जाता है।

क्योंकि ज्यादातर लोगों का बहाना यही होता है कि मुझे तो लोहा लगा नही, अथवा लोहा जंग लगा नही था तो मुझे इजेक्शन नही लगवाना इत्यादि।

अतः इसका उत्तर अगर quora पर दे दिया जाय तो यह जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँच जायेगी, तथा इससे जुड़ी भ्रान्तियाँ दूर हो जाएंगी।

सबसे पहले तो यह कि — टेटनस क्या होता है?

टेटनस एक खतरनाक बीमारी है जो टेटनी नामक विषाक्त बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टिरिया खुले वातावरण धूल, मिटटी और प्रदूषित तत्वों (टॉक्सिक तत्वों) में मौजूद रहता है। जब कभी आपको चोट लगती है तो आपकी खुली त्वचा इस बैक्टिरिया के संपर्क में आ जाती है, जिससे टेटनस हो जाता है।

अब आपके प्रश्न पर आते हैं। यह गलत अवधारणा है कि टेटनस सिर्फ लोहे से कटने पर होता है।

वास्तव में टेटनस किसी भी प्रकार की चोट लगने के बाद हो सकता है। चोट चाहे लोहे, शीशे, लकड़ी, पत्थर या फिर गिरने से लगे या आप जब किसी सर्जरी को जाते हैं, इनमें से किसी से भी इंफेक्शन हो जाए तो टिटेनस होने की संभावना बनी रहती है।

यानि आपकी स्किन फ़टी, उसमें खून निकला और वह स्थान किसी टिटेनस प्रदूषित चीज (धूल मिट्टी अथवा प्रदूषित कणों) के सम्पर्क में आया, तो टेटनस होने की सम्भावना रहती है।

इसीलिए यह आवश्यक है, कि जब भी आपको चोट लगे आप टेटनस टॉक्साइड का इंजेक्शन अवश्य लगवाएं ताकि टेटनस जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।

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