“सिंदूर खेला” क्या है और किससे संबंधित है? जानिए

सिंदूर खेला :- मुख्यत: प० बंगाल में हिंदू महिलाओं खाशकर विवाहित महिलाओं का एक बहुत हीं पौराणिक व मुख्य खेल है ।

दशहरे के दिन जिसे बिजोया दशमी कहते हैं बंगाल में -उस दिन हिंदू विवाहित महिलायें माता दुर्गा के आशिर्वाद व प्रसाद रूप में सभी महिलायें सुहागिन श्रींगार कर व नये वस्त्र पहन एक दुसरे को सिंदूर लगाती हैं ।

सिंदूर लगा लगा कर खेला करना अर्थात बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीकात्मक एवं एक दूसरी को सिंदूर लगाकर सदा सुहागिन रहने की मनोकामना करती हैं -और इसे माँ दुर्गा का प्रसाद व आशिर्वाद समझती हैं ।।🙏🏻।।

सिंदूर खेला के दौरान पान के पत्तों से मां के गालों को स्पर्श किया जाता है, इसके बाद उनकी मांग को सिंदूर से भरा जाता है और माथे पर भी सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद मां को पान और मिठाई का भोग लगाया जाता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। फिर सभी महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और लंबे सुहाग की कामना करती हैं। माता की इसी दिन धूमधाम से नाच गाकर बिदाई भी की जाती है ।।

कई जगहों पर इस दिन सुहागिन महिलाओं द्वारा एक विशेष नृत्य भी किया जाता है जिसे धुनुचि नृत्य कहते हैं :

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