वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा किधर होनी चाहिए?

एक घर में शौचालय का निर्माण वहां रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य और धन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। वास्तु के अनुरूप, घर शांति और विकास के साथ एक स्वास्थ्य मुक्त घर प्रदान करता है। घर के लिए वास्तु का विचार करते समय, आपको अपने घर में शौचालय और स्नानघर बनाने के लिए विशेष ध्यान देना चाहिए। बाथरूम और शौचालय अलग अलग बना है तो बहुत अच्छा माना जाता है। वैसे आजकल लोग संयुक्त बाथरूम और शौचालय बनवाते है। यदि वे वास्तु के नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं बनाए गए तो नकारात्मक ऊर्जा का आगमन हो जाता है और कई बड़ी समस्याओं जैसे वित्त हानि, स्वास्थ्य समस्याएँ, मानसिक तनाव आदि को जन्म देता है।

यहाँ शौचालय बनाने के लिए कुछ वास्तु नियम इस प्रकार है :

1. वास्तु के अनुसार शौचालय, पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित होना चाहिए। अगर संयुक्त बाथरूम और शौचालय बना है तो उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

2. केंद्र में और घर के पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में शौचालय के निर्माण से बचें।

3. शौचालय पूजा कक्ष, रसोईघर और सीढ़ियों के पास नहीं बनना चाहिए।

4. वेस्ट कमोड (WC) हमेशा दक्षिण-पूर्व / उत्तर-पश्चिम की तरफ होना चाहिए या उत्तर / दक्षिण की ओर होना चाहिए।

5. शौचालय का दरवाजा पूर्व दिशा में होना चाहिए।

6. वेस्ट कमोड (WC) को कभी भी बाथरूम के दरवाजे के सामने नहीं बनना चाहिए।

7. अगर अलमीरा है, तो यह हमेशा शौचालय के दक्षिण-पश्चिम की ओर होना चाहिए।

8. बाथरूम के फर्श की ढलान उत्तर – पूर्व की ओर होनी चाहिए ताकि बाथरूम के उत्तर-पूर्व की ओर पानी का निकास हो।

9. शौचालय की दिवारें पर हलके रंग की पुताई होनी चाहिए ।

10. शौचालय में पूर्व, पश्चिम या उत्तर दिशा की दीवार में एक छोटी खिड़की लगाये।

11. पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में पानी, नल आदि को स्टोर करें।

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