पद्मनाभ स्वामी मंदिर का आँठवा दरवाज़ा क्यों नहीं खोला गया?

श्री पद्मनाभस्वामी का मन्दिर भगवान विष्णु का विश्राम स्थल माना जाता है। इसका अर्थ है जिसके नाभि में कमल है इस कमल से ही सृष्टि का सृजन हुआ है।

रहस्य- इस मंदिर का संचालन त्रावणकोर का शाही परिवार ट्रस्ट के माध्यम से कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 7 लोगों की कमेटी ने मन्दिर के दरवाजे को खोलने का प्रयास किया जिसमें से अकूत सम्पत्ति निकली।

बीमारी और मौत 6 दरवाजे तक तो सब सही चल रहा था लेकिन उसके बाद दरवाजा खोलने गये कमेटी के सदस्यों के साथ अनहोनी होने लगी, एक सदस्य पर बीमारी ने हमला कर दिया और उसने आगे दरवाजा खोलने से मना कर दिया, दूसरे व्यक्ति ने खोलने का प्रयास किया और उसके माँ की मौत हो गयी, सुन्दर राजन जिसने कोर्ट में याचिका दायर किया था उसकी भी मृत्यु हो गयी।

मान्यतायें- ऐसा कहा जाता है कि त्रावणकोर के राजा ने सभी धर्मों के सिद्ध पुरुषों, तांत्रिकों और अघोरियों को बुला कर वह दरवाजा नाग बंधन करके बन्द करवाया था।

दूसरी मान्यता है कि यह सीधे पाताल लोक से जुड़ा हुआ है। जो भी खोलने जायेगा वह सीधे समुद्र से होकर पाताल में पहुँच जायेगा।

अगली मान्यता के अनुसार अंदर कोई सुरंग है । जहाँ से नाग लोक का रास्ता जाता है। जहाँ अत्यंत कीमती मणिक, मोती नाना प्रकार के हीरे जवाहरात हैं और उनकी रक्षा शक्तिशाली नाग कर रहे हैं।

कैसे खुलेगा दरवाजा केवल उच्च कोटि के साधु और योगी जिन्होंने गरुड़ मंत्र को सिद्ध हस्त कर लिया है वही इस दरवाजे को खोल सकते हैं। जब सटीक आवृत्ति की मंत्र की ध्वनि उस दरवाजे से टकरायेगा तभी वह दरवाजा खुला सकता है अन्यथा तबाही, दुर्भाग्य और विपत्तियाँ जबरदस्ती खोलने वाले को अपनी चपेट में ले लेंगे।

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