पद्मनाभस्वामी मंदिर के 7बे दरवाजे का क्या रहस्य है? क्लिक कर के जाने

पद्मनाभस्वामी मंदिर

श्री पद्मनाभस्वामी के मंदिर को भगवान् श्री विष्णु जी का विश्राम स्थल माना जाता है। केरल के तिरुअनंपुरम में स्थित इस मंदिर का संचालन त्रावनकोर का शाही परिवार करता है। इसी मंदिर मे पद्मनाभस्वामी की मूर्ति है, इसकी स्थापना कब और किसने कि इसका कोई प्रमाण नही है। ये माना जाता है कि इसकी स्थापना ५००० वर्ष पूर्व कलयुग के शुरू होने के समय हुई थी।

रहस्य-:

सुप्रीकोर्ट के आदेश के बाद जब मंदिर के दरवाजा खोलने गए कमेटी के सदस्यों के साथ अजीब घटनाएं होने लगी, एक सदस्य ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया तो वो बुरी तरह बीमार पड़ गया और उसने दरवाजा खोलने से मना कर दिया, दूसरे सदस्य ने खोलने की कोशिश की उसकी मां की मौत हो गई यहां तक कि जिसने याचिका दायर की थी दरवाजा खोलने की उसकी भी मृत्यु हो गई।

तहखाना-:

इस मंदिर ६ तहखाने है और इक सातवा द्वार, जिनको A, B, C, D, E & F नाम दिया गया है, कुछ मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण ६ शताब्दी में त्रावनकोर के महाराज द्वारा करवाया गया था और उन्होंने मंदिर में तहखाने बनाते हुए अपना खजाना यहां छुपा दिया था, उन्होंने तांत्रिको द्वारा इस दरवाजे को मंत्रो से तथा नाग बंधन करके बंद करवाया था। सैकड़ों सालों तक किसी ने इसे खोलने की हिम्मत नही की और बाद में इसे शापित माना जाने लगा। बीच में कई लोगों ने इसे खोलने की कोशिश की लेकिन सब नागों द्वारा या किसी ना किसी बीमारी से मारे गए।

सुप्रीकोर्ट के आदेश के बाद जब तहखाना खोला गया तो A, C, D, E, F तो खुल गए लेकिन B नहीं खुल पाया। ये सारे तहखाने लोहे के दरवाजे से बने हुए थे और अन्दर भारी लकड़ी का दरवाजा लगा था जो जमीन के २० फुट अन्दर था। खोले गए तहखाने से १,३२,००० करोड़ के सोने, हीरे जैसे रत्नों के गहने, मूर्तियां और निकली, इसके साथ ही इसमें २८ किलोग्राम का एक बैग भी था जिसमे अलग अलग देशों के राष्ट्रीय सिक्के थे।

सातवे दरवाजे का रहस्य-:

मंदिर का सातवां दरवाजा सबसे ज्यादा शापित माना जाता है जो अभी तक खोला नहीं जा सका है। माना जाता है कि इस सातवे द्वार में दो लाख करोड़ से ज्यादा का सोना है। दरवाजे के पीछे से पानी की आवाज आया करती हैं और ये माना जाता है कि ये सापों की आवाज है। मान्यता यह है कि यह दरवाजा तभी खुलेगा जब उच्च कोटि का साधु या योगी जिसने गरुण मंत्र सिद्ध किया है वही इस दरवाजे को खोल सकता है, जब वो मंत्र को उच्चारित करेगा तो मंत्र की सही तरंग जब उस दरवाजे से टकराएगा तभी ये दरवाजा खुलेगा अन्यथा जबरदस्ती खोलने वाले के साथ कोई ना कोई दुर्घटना या मृत्यु भी हो सकती है।

सुप्रीकोर्ट के आदेश के बाद जो लोग ये दरवाजा खोलने गए थे उनके अनुसार इस दरवाजे पर लगे ताले को खोलना बहुत मुश्किल है इस पर दो बड़े कोबरा की आकृति बनी हुई है और कोई भी कब्जा या नट बोल्ट नहीं है। कई साधुओं ने इसे खोलने की कोशिश की लेकिन अभी तक कोई सफल नहीं हो पाया और इसका खजाना अनुमान से भी कहीं ज्यादा बड़ा है, और शायद इन्हीं सब वजहों से इसका रहस्य अभी तक बना हुआ है।

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