धोनी को कैप्टन कूल क्यों कहा जाता था?

धोनी को कप्तान कूल के नाम से जाना जाता है। वह सिर्फ एक अच्छे खिलाड़ी ही नहीं बल्कि एक सज्जन व्यक्ति भी है। वह सभी चरम मामलों में शांति और धीरज रखता है।

आपने कभी भी धोनी को चिल्लाते हुए नहीं देखा होगा, कम से कम खेल के मैदान पर तो नहीं। वह हर कठिन परिस्तिथि में शांत रहता है जो उन्हें सोचता है और समझदारी से निर्णय लेने में मदद करता है।किसी भी दवाब के समय फिर चाहे वो बल्लेबाजी हो, टीम की अगुवाई हो या जीत और हार की स्तिथि हो वह हमेशा शांत रहकर सोचती है, इसी कारण से वह चुनौतियों के आने पर बहुत सतर्क, केंद्रित, बेहद निशाने पर रहती है।

वह स्टेडियम या लोगो की देखभाल नहीं करते की कोई उनके बारें में क्या सोचेगा, उनका यही व्यवहार्हार उन्हें कप्तान कूल बनाता है।

महेंद्र सिंह धोनी भारत के ही नहीं दुनिया के सबसे अच्छे कप्तानों में से एक हैं।

धोनी को देख कर लगता है की कप्तान हो तो ऐसा, उनका कौशल सिर्फ अपने खेल तक ही सीमित नहीं है बल्कि एक अच्छे मार्ग दर्शक के तौर पर भी उभरने के आता है।

एक अच्छा कप्तान कौन होता है?

उत्तर आइने की तरह साफ है, जो व्यक्ति निःस्वार्थ अपने देश के लिए खेलता है और अपने साथ-साथ अपनी टीम को भी हर मुश्किल परिस्थति के पार चलता है वही सही मायनों में अच्छा कप्तान होता है। ।

इन सभी सैनिकों के साथ एक और बड़ी खूबी है जो धोनी को भारत के कप्तान के रूप में खड़ा रख सकी, वह है उनका धीरज।

महेंद्र सिंह धोनी का नाम यूँ ही “कप्तान कूल” नहीं पड़ा, वह अपनी इस उपाधि पर हर टूर्नामेंट में अमल करते हुए चलते हैं।

मैच की स्थति इतने भी अनुकरणुलित क्यों न हो, उसका प्रभाव आपको धोनी के हाव-भाव में नहीं है।

वह अपना धैर्य किसी भी परिस्थिति में नहीं खोते और यही बात उनके टीम के खिलाड़ियों को केंद्रित रहने में मदद करता है, उन्हें “शांत” रखता है साथ ही साथ हमारे कप्तान की “शांत” उपाधि को भी सही साबित करता है।

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