दुबई में होने वाले क्रिकेट आईपीएल में पब्लिक नहीं है फिर शोर क्यों होता है?

दुबई में जारी आईपीएल के ताजा संस्करण में कॉरोना महामारी के कारण दर्शकों को मैदान में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। लेकिन टीवी पर मैच के सीधे प्रसारण के समय हम खाली स्टेडियम की निराशा के बावजूद उठते शोर को सुनकर जरुर हैरान होते हैं। कम से कम यह शोर सीधे प्रसारण को सही मायने में “लाइव” बनाता है।

इस “लाइव” का श्रेय जाता है, युएई से २००० किलोमीटर दूर मुंबई में बैठे उन इंजिनियरों को, जिन्होंने एक स्टूडियो में पूरी ‘साउंड बैंक’ तैयार की है। इसी साउंड बैंक की मदद से दर्शकों से खचाखच भरे हुए स्टेडियम का वातावरण तैयार किया जाता है। मतलब कि आपको मुंबई के वानखेडे, बंगलुरू के चिन्नास्वामी, या चेन्नई के चेपोक स्टेडियम में मैच खेला जा रहा हो ऐसी अनुभूति हो।

मैच के सीधे प्रसारण में “लाइव” फील लाने के लिए आईपीएल के तीन महीने पूर्व से रिसर्च और तैयारी की गई है। इसके लिए २०१८ के आईपीएल के लगभग १०० मैचो के साउंड का अभ्यास किया गया था। यही नहीं, बल्कि एक खास टीम और वो जिस टीम के साथ खेल रही हो, वो टीम, दोनों से जुड़े हुए साउंड को बेहद ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। उदाहरण के लिए यदि चेन्नई सुपर किंग्स पर मुंबई इंडियन के मुकाबले में साउंड का डेसीबल लेवल, किंग्स इलेवन पंजाब और दिल्ली डेयरडेविल्स के मुकाबले से एकदम अलग होगा।

प्रत्येक टीम और उसके खिलाड़ी के साथ जुड़े अलग अलग साउंड का फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा या विराट कोहली जब सिक्सर लगाते हैं, तो स्टेडियम से जो हर्षनाद उठता है वो न्ए खिलाडी की सिक्सर से उठने वाले नाद से अलग होगा। कूच के छूटने पर दर्शकों के प्रतिभाव का साउंड और कोई बल्लेबाज शाॅट को मिस करता है तो उसके साउंड की भिन्नता का भी अभ्यास किया गया है।

इन विभिन्न साउंड्स को मिक्स करने के कारण ही टीवी पर आईपीएल ऐसी “लाइव” प्रतीत हो रही हैं।

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