चुड़ैल का हुआ हृदय परिवर्तन कहानी

कोड़ा गांव में भूतो का डर लोगों के दिमाग में इस कदर समा चुका था की कोई भी अपने घर शाम होने के बाद नहीं निकलता था। महेश भी अपनी ऑफिस के छुट्टी के बाद कोड़ा गांव जाने वाला था उसने मां को फोन लगाया और कहा मां मेरे आफिस की छुट्टी चल रही है कम से कम पंद्रह दिन के लिए आफिस बंद रहेगा इसलिए मैं गांव आ रहा हूं। मां ने कहा बेटा अगर आने का मन बना ही लिया है तो शाम ढलने से पहले आ जाना लेट मत करना। मां की यह बात महेश को अजीब लगी आखिर शाम से पहले ही क्यो आखिर समय है आगे पीछे हो ही जाता है फिर भी चलो जैसा मां ने कहा वैसा ही करते हैं बड़बड़ाते हुए महेश अपनी कल की तैयारी में लग गया अगली सुबह उसने बस पकड़ी और दोपहर तक घर पहुंच गया शाम को उसने मां से कहा मां थोड़ा सा खेत तरह से होकर आता हूं।

मां ने डांटते हुए कहा अभी कुछ नहीं कही नहीं जाना है अब कल सवेरे ही निकलना घर से। मां की यह हरकतें महेश की दिमाग में सवाल पे सवाल पैदा किये जा रही थीं। अगली सुबह उठकर वह खेत और आसपास के लोगों से मिलने पहुंचा पुराने दोस्तों से उसकी बातचीत हो रही थी। इसी बीच महेश ने आखिरकार पूछ ही लिया यार यहां शाम वाली क्या बात है की शाम होते ही घर से कोई निकलता ही नहीं। एक दोस्त ने कहा एक चुड़ैल निकलती है कहते हैं उसके बच्चे को उसके सामने कुछ गांव वालों ने मिलकर मार दिया था वह कोई बाइस साल का युवक था उसके बाद उसकी मां को भी मार दिया गया जो की अब चुड़ैल हो चुकी है और अपने बेटे के मौत का बदला गांव के सभी लोगों से लेना चाहती है क्योंकि जब उसके बेटे को कुछ लोगों ने मारा था तो गांव के और लोग केवल तमाशा देख रहे थे इतना कहकर वह युवक चुप हो गया। महेश ने कहा चाहे कुछ भी हो जाये मैं उस चुड़ैल को जरूर देखना चाहुंगा और कब मुझे इंतज़ार है रात के समय का। अब महेश इंतजार करने लगा शाम होने का जैसे शाम हुआ सब अपने घर में दुबक गये इधर महेश भी अपनी मां के सामने सोने का नाटक करने लगा उसे बस इंतजार था सही समय का अब मां भी सो चुकी थी घड़ी में कोई आठ बज रहे थे महेश कुछ सामान लेकर घर से निकला जिसमें कुछ कपड़े और खाने की चीजें थीं।

कुछ देर बाद एक भयानक हंसी की आवाज गूंजने लगी। महेश ने देखा कुछ दूर से एक डरावनी चेहरे वाली चुड़ैल चली आ रही है वह मनही मन घबराया लेकिन वह उसी जगह डटा रहा। चुड़ैल ने कहा मैं तुझे मारूंगी तड़पा तड़पा के तुझे मुझसे तनिक भी डर नहीं लगा। महेश ने कहा मां से कैसा डरना मां मैं तुम्हारे लिए कुछ सामान और खाना लाया हूं मेरे मरने से पहले मेरी यह इच्छा पूरी करदे मां फिर मुझे मारकर अपना गुस्सा शांत कर लेना। इसके बाद महेश ने उसे दो नई साड़ी दी और अपने हाथों से खाना खिलाने लगा चुड़ैल ने उसे घूरकर देखा। महेश ने कहा मरने वाले की यह इच्छा तो पूरी कर दो मां। चुड़ैल ने ना चाहते हुए भी महेश के हाथ से खाने के कुछ निवाले खाये और खाने के बाद चुड़ैल से महेश ने कहा अब मुझे मार दिजिए अपनी मां के हाथ से मरने में मुझे कैसा अफसोस। लेकिन यह क्या चुड़ैल ने उसे हाथ तक नहीं लगाया और रोने लगी मैं हार गई मेरे सामने मेरे बेटे की स्त्रियां और उसके बाद मेरी हत्या के बाद मैं बदले की भावना के कारण चुड़ैल बन गई थी मगर आज मैं लगता है इस चुड़ैल जीवन से मुक्त हो जाऊंगी इतने कहते ही वह हमेशा के लिए हवा में मिल गई क्योंकि महेश उसके अंदर की चुड़ैल और बदले की भावना को अपने पर्याय के हथियार से मार चुका था।

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