चश्मों का फ्रेम उनके लेंस से भी ज़्यादा महँगा क्यों होता है? जानिए

दरअसल सच्चाई यह है कि जो फ्रेम आपको दुकानदार ३०० या ४०० रुपए का बेचता है वो सारी फ्रेम वे सेट के भाव से एक बाजार से लेते है तो उन्हें एक फ्रेम २० या ३० रुपए का पड़ता है। आप देख लीजिए आपको कैसे लूटा जा रहा है।

जो ग्लास होते है वो आपके आंखो के नंबर और क्वालिटी पर निर्भर करता है जितना नंबर और क्वालिटी उतना दाम। जब आप प्रिक्सकिप्शन देते है तब दुकानदार उस नंबर के ग्लास मंगवाता है किसी कंपनी से बनवाकर को एक telescope के लेंस के जैसे गोल होते है पैसे तो आपसे उसके ही लेते है बाद में आपको उस गोल ग्लास को काट के फ्रेम में फिट किया जाता है

एक साधारण फाइबर का ग्लास १०० रुपए का आता है उसमे coating का १०० रुपया , एंटी इस्क्राच का रुपया, एंटी डस्ट, यूवी किरणों से बचाव आदि जोड़ने से कीमत बढ़ा दी जाती है और ग्राहक को लूट लिया जाता है इनमें से कई चीजों की तो ज़रूरत भी नहीं होती बस ग्राहक को मूर्ख बना के पैसे लिए जाते है।

लूट तो इनमें भी मचा रखी है पर थोड़ी सी जानकारी हो तो अपने आप को कम लुटवाया जा सकता है। आप टाइटन का २००० का फ्रेम ले या कोई २०० वाला कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे अच्छा आप २०० की फ्रेम लेकर १८०० ग्लास में डालकर अच्छा चस्मा बनवा सकते है।

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