क्यों नहीं करनी चाहिए अविवाहिता को शिवलिंग की पूजा?

बिलकुल अगर वो अच्छा पति न चाहे, कष्ट दुख अदि उसे प्रिय हों, अंधविश्वास और ढोंगी गुरु माने और नरक जाना चाहे ऐसी अविवाहित स्त्री को शिवलिंग पूजन नहीं करना चाहिए,

क्यूंकी अगर ऐसा किया यानि शिवलिंग पूजन किया भक्ति से तो बहुत संभव है, की अच्छा पति मिल जाये, अच्छा घर मिले, जीवन सुख और शुभता बहुत मिले, ज्ञान सिद्धि ऐश्वर्या अदि भी मिल जायें भरोसा नहीं है, तो ये सब शुभता किस स्त्री या पुरुष को नहीं चाहिए, वो कृपया शिवलिंग पूजन नहीं करें,

ऐसे लोग तो किसी ढोंगी नारकीय मूर्ख टीवी वाला बाबा के गंदे चरण धो के पीएं, बीमारियां बनाएं, और खुद जानवर और जीवन नरक बनायें, और कीड़े मकोड़ों की भाँती रहे, शिव को किसी की पूजा नहीं चाहिए, सारा संसार उसका है, गंगा उसके शीश पे है, तुम्हारा नल के पानी का वो क्या करेगा, सारे समुद्र उसके हैं, सारे वनस्पति पुष्प पेड़ पौधे उस के ही हैं, उसे तुम क्या पुष्प पत्र चढ़ाओगे, तो मूर्ख नारकीय धींगी जानवर दुष्ट और कोंग्रेसी लोग दूर रहें शुभता से , शिवा से कल्याण से.

पर वो सब विवाहित अथवा अविवाहित स्त्री अथवा पुरुष सब के सब कोई जात पात का चक्कर नहीं सब के सब, जिन्हे शिव पे श्रद्धा भक्ति है, जो अपना सब प्रकार से कळल्यान शुभ चाहें, जीवन को सुन्दर और आनंद पूर्ण बनाना चाहे वो शिवा पूजन अवश्य करें, विवाह के पहले भी बाद में भी हमेशा, श्रद्धा भक्ति से जो जल पुष्प भक्त चढ़ाता है, शिव उसे प्रे,म से ग्रहण करते हैं, आशीर्वाद देते हैं,

सारी देवियों ने शिवा पूजन किया है, करती हैं हमेशा, गौरी लक्ष्मी सरस्वती अरुंधति, लोपमुद्रा, गार्गी, सीता राधा गोपियाँ , सबने शिवा पूजन बहुत किया है, लक्ष्मी जी ने विष्णु प्राप्ति के लिए शिव को ही मनाया शिवलिंग की ही पूजा की, उनके पतिदेव तो हैं ही परमशिव सेवक , उनके भक्त भी शिव पूजते हैं,

सौ बात की एक बात, जिसे शुभता कल्याण चाहिए शिवा पूजे, जिसे नरक चाहिए, उससे शिव पूजन नहीं हो गा,हाँ बिना पुण्य उदय हुए बिना अति कृपा प्राप्त हुए, शिव पूजन कोई सिर्फ अपनी चाह से नहीं कर सकता, जब तब तक महँ पुण्य और शक्तिशिव कृपा नहीं होगी शिवपूजन कोई नहीं कर सकता , जिस के करोड़ों अरबो जन्मो के पुण्य जब सब के सब उदय होते हैं, तब ही उसे शिवकी भक्ति प्राप्त होती है, शिव भक्ति आसान नहीं है, अन्य देवो के मनुष्य की तरह बरतने वाले अवतारों के भक्त बहुत आसानी से बना जा सकता है, पर इन अवतारों ब्रम्ह विष्णु के बाप शिव इन की उपासन पूजा भक्ति सिर्फ परम सौभाग्यवान को ही मिल सकती है. तभी विष्णु जिन को सब पूजते हैं शिवा का पूजन करते हैं , और ध्यान रहे शिव किसी का पूजन नहीं करते , उनक इष्ट कोई नहीं, है,

ये सांसारिक द्वैत वादी संतों ने भ्रम फैला रखा है, मूर्खता पूर्ण द्वैत वाद के लिए, के शिव किसी को मानते हैं ेट्स, महाशिव के अंश हैं महारुद्र , उनके अंश हैं रूद्र , इन मूलरुद्रा के ११ अंश ११ रूद्र कहे जाते हैं, ये त्रिदेवों में आते हैं, शिवा त्रिदेवों और अवतारों से कहीं, ऊपर हैं, परे हैं, ये ग्यारह रूद्र ही लीला करते हैं, और सांसारिक जनों को उनके द्वैत सवरूप भगवान में श्रद्धा हो जाये इसलिए अन्य देवो की तारीफ अदि करते हैं, ये एकादश रूद्र भी अवतारों, त्रिदेवों की तरह महारुद्र में लीं हो जाते हैं, पर महारुद्र शिवा अव्यय हैं, परमणित्य हैं, उनका ही स्वरुप है शिवलिंग

इसलिए सबके ईश्वर जिनका ईश्वर अथवा मान्य पूज्य अपूज्य कोई नहीं, वो ही हैं शिवलिंग रुपी शिव, ये बात मानने की नहीं है विज्ञानं और सत्य की है, वैज्ञानिकों ने भी इस जगत का परम कारन किसी, देवता या मसीहा क्राइस्ट या अवतार को नहीं जाना, परन्तु उन्हें भी शिवलिंग ही मिला जिससे की सारा ब्रम्हांड उत्पन्न होता है,

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