अगरबत्ती का क्या इतिहास है? ये कब से आराधना में उपयोग होने लगी?

अगरबत्ती का सबसे पुराना स्रोत वेदों में है, विशेष रूप से अथर्व-वेद और ऋग्वेद में। मनभावन सुगंध और एक औषधीय उपकरण बनाने के लिए धूप बत्ती और अगरबत्ती का उपयोग किया जाता था। चिकित्सा में इसके उपयोग को आयुर्वेद का पहला चरण माना जाता है, जो धूप को चिकित्सा के एक तरीक़े के रूप में उपयोग करता है।

अगरबत्ती का सबसे पुराना स्रोत वेदों में है, विशेष रूप से अथर्व-वेद और ऋग्वेद में। मनभावन सुगंध और एक औषधीय उपकरण बनाने के लिए धूप बत्ती और अगरबत्ती का उपयोग किया जाता था। चिकित्सा में इसके उपयोग को आयुर्वेद का पहला चरण माना जाता है, जो धूप को चिकित्सा के एक तरीक़े के रूप में उपयोग करता है। धूप बनाना मुख्य रूप से केवल भिक्षुओं द्वारा किया जाता था।

धीरे-धीरे हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने भी अगरबत्ती जलाने की परम्परा शुरू कर दी। सन 200 के आसपास कुछ भिक्षुओं ने चीन में अगरबत्ती का उपयोग आरम्भ किया।

भारत दुनिया का मुख्य अगरबत्ती बनाने वाला देश है।

और अन्य देशों के लिए एक प्रमुख निर्यातक है (हालांकि कच्चे माल की बढ़ती लागत और अन्य कारकों के कारण निर्यात बिक्री बढ़ाने में समस्या रही है, जैसे पश्चिमी देशों में कुछ लोगों ने बिना सुगंध वाली अगरबत्ती खरीदना शुरू कर दिया है, और भारतीय कंपनियां नक़ली अगरबत्ती का उत्पादन करती हैं)।

भारत में हज़ारों वर्षों से लोग अगरबत्ती जलाते रहे हैं, और ऐतिहासिक रूप से भारत ने चीन और जापान जैसे अन्य एशियाई देशों में भी इस विचार का निर्यात किया है।

अगरबत्ती एक बत्ती है जिसे जलाने पर सुगंधित धुँआ निकलता है।

अगरबत्ती का उपयोग लगभग प्रत्येक भारतीय घर, दुकान तथा पूजा-अर्चना के स्थान पर अनिवार्य रूप से किया जाता है। सुबह की दिनचर्या प्रारंभ करने से पहले प्रत्येक घर में अगरबत्ती जलाई जाती है, जो स्वतः ही इस उत्पाद की व्यापक खपत को दर्शाता है। अगरबत्तियां विभिन्न सुगंधों जैसे चंदन, केवड़ा, गुलाब आदि में बनाई जाती हैं।अधिकांशतः उपभोक्ताओं को इनकी किसी विशेष सुगंध के प्रति आकर्षण बन जाता है तथा वे प्रायः उसी सुगंध वाली अगरबत्ती को ही खरीदते हैं।

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