Apple के मोबाइल फोन महंगे होने के कई कारण हैं। इसे समझने के लिए, हम टेक्निकल, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पहलुओं को देख सकते हैं।
प्रीमियम बिल्ड क्वालिटी: Apple अपने iPhones में एल्यूमीनियम, स्टेनलेस स्टील और हाई-क्वालिटी ग्लास जैसे मटीरियल का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब है न सिर्फ प्रीमियम लुक, बल्कि ड्यूरेबिलिटी और हल्का डिज़ाइन भी।
इन-हाउस टेक्नोलॉजी और डिज़ाइन: Apple अपने खुद के प्रोसेसर (A-सीरीज़ चिप्स) डिज़ाइन करता है, जो परफॉर्मेंस में तेज़ और एनर्जी-एफ़िशिएंट होते हैं। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक साथ मिलकर बिना किसी रुकावट के काम करते हैं, जिससे एक प्रीमियम यूज़र एक्सपीरियंस मिलता है।
सॉफ्टवेयर और अपडेट सपोर्ट: iPhones को लगातार iOS अपडेट मिलते रहते हैं, अक्सर 5-6 सालों तक। यह लॉन्ग-टर्म सपोर्ट एक कारण है कि वे Android फोन से ज़्यादा महंगे होते हैं।
ब्रांड वैल्यू और मार्केटिंग: Apple एक प्रीमियम ब्रांड है। लोग इसकी इमेज और ब्रांडिंग के लिए ज़्यादा पैसे देने को तैयार रहते हैं। इसका डिज़ाइन, एडवरटाइजिंग और स्टोर एक्सपीरियंस सभी महंगे हैं।
सिक्योरिटी और प्राइवेसी: iPhones डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी को प्राथमिकता देते हैं। Face ID, Touch ID और एन्क्रिप्शन जैसी टेक्नोलॉजी को लागू करना महंगा होता है।
रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D): Apple हर नए iPhone में नई टेक्नोलॉजी और फीचर्स शामिल करता है। यह लागत भी फोन की कीमत में शामिल होती है।
सप्लाई चेन और इंपोर्ट ड्यूटी: Apple के हार्डवेयर और कंपोनेंट्स दुनिया भर से मंगवाए जाते हैं। इसमें शिपिंग, टैरिफ और टैक्स शामिल हैं, जिससे भारत जैसे देशों में कीमत बढ़ जाती है।
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