महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए रखा व्रत, जानिए वट सावित्री का महत्व

पौराणिक व्यवस्थाओं और हिन्दू धर्म की मान्यताओं के आधार पर हिन्दू धर्म की सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री अमावस्या के अवसर पर वट वृक्ष की पूजा अर्चना करते हुए अपने पतियों की दीर्घआयु की कामना की है। सुहागिन महिलाओं ने शुक्रवार को प्रातः से ही व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर व्रत खोला है।

आपको बतादें आज शुक्रवार को ज्येष्ठ मास की इस दिन हिन्दू पौराणिक व हिन्दू धर्म के अनुसार सुहिगिनो ने बरगद वृक्ष की पूजा अर्चना के साथ गौरी गणेश और भगवान ब्रह्मा की पूजा अर्चना की। साथ ही माता सती सावित्री और सत्यमार्ग पर चलने बाले सत्यवान की कथा का श्रवण करते हुए अपने पतियों की दीर्घआयु की प्रार्थना की है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता सती सावित्री ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर भगवान ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर यमराज के यहां से अपने मृत पति सत्यवान को वापस बुला लिया था।

उन्होंने भगवान ब्रह्मा जी से अपने पति की आयु बरगद के समान वरदान के
रूप में मांगने की कामना की थी। तभी से यह हिन्दू धर्म की पौराणिक परम्परा को हिन्दू सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती चली आ रही हैं।

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