भारत को पैरालंपिक्स में गोल्ड दिलाने वाले खिलाड़ी लॉकडाउन में मिट्टी के बर्तन बेचने को क्यों हुए मजबूर

पैराएथलीट चैंपियन रवि कुमार लॉकडाउन के इन दिनों में मिट्टी के घड़े बेचने पर मजबूर हैं। मेरठ निवासी इस जीवट खिलाड़ी का पचास
फीसदी शरीर लकवाग्रस्त है। कोरोना महामारी के दौरान कमाई के सारे दरवाजे बंद होने पर इस परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट
आया, ऐसे में खिलाड़ी ने अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए मिट्टी के बर्तन बेचने शुरू किया।

कभी न हारने की कसम खाने वाले इस खिलाड़ी ने अपने आधे शरीर से ही कामयाबी की उड़ान भरी रवि कुमार ने 2019 में वर्ल्ड पैराएथलीट चैंपिनयनशिप में पैसठ देशों के खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए सौ मीटर रेस में स्वर्ण पदक जीता था।


अब लॉकडाउन में कमाई का कोई साधन न होने पर इस पैरा खिलाड़ी को जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो वह मिट्टी के घड़े बेचकर अपना और
अपने परिवार का पेट पालने लगा। टीम इंडिया की टीशर्ट और हाथ में मिट्टी का घड़ा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

रवि कुमार ने अब तक पैराएथलीट चैंपयिनशिप में स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर कई पदक जीते हैं। बावजूद उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली।
लेकिन इसका उन्हें जरा भी मलाल नहीं है। रवि कुमार का कहना है कि अपना कर्म करते रहना चाहिए, फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए।

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