ईरान क्यों खारिज कर रहा है भारत की तरफ से मिले हुए कॉन्ट्रेक्ट।

भारत और चीन इन दो देशो के बीच बढ़ रही खीचतान में इरान अपना पलटा करता नजर आ रहा है। आज से 4 साल पहले 2016 में 2 दिन के लिए नरेन्द्रमोदी जी ने ईरान का दौरा किया गया था। जहां मोदीजी ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहा के साथ 12 समजूतिया कि थी। यह कदम हमारी दोस्ती का हाथ ईरान की तरफ खिंचा गया था। लेकिन आज ईरान दूर होता नजर आ रहा है और चीन की तरफ जुकता चला जा रहा है। चीन ने ईरान के साथ दोस्ती करने के लिए 32 लाख करोड़ रूपये खर्च किये है ऐसा सामने आ रहा है।

इंडियन रेलवे को ईरान के चाबहार बन्दर से 628 किलोमीटर दूर स्थित जाहिदान तक तथा वहां से 1000 किलोमीटर दूर उतर-पूरब ईरान-तुर्कमेनिस्तान की बॉर्डर पे आया हुआ सरख्स तक रेलवे मार्ग बनाने का कॉन्ट्रेक्ट मिला था। लेकिन इस परियोजना को ईरान ने रद कीया है और भविष्य में यह कॉन्ट्रेक्ट चीन द्वारा पूरा किया जाएगा।ऐसे न्यूज़ मिल रहे है। भारत के लिए यह कॉन्ट्रेक्ट बहोत महत्व पूर्ण भी था। क्योंकि गुजरात के बन्दर से भेजा गया सामान ईरान के चाबहार बन्दर पर सिर्फ 9 घंटे में तथा वहां से 11 घंटे में अफ़ग़ानिस्तान के काबुल तक पहोचा सकते है।इसी लाइन के द्वारा अज़रबैजान, तुर्कमेंनिस्तान,कज़ाकिस्तान,उज्बेकिस्तान ओर इसके नज़दीकी देशो में भारत का व्यापार खुल सकता था । लेकिन यह भारत का सपना खत्म हो गया है। भारत का चाबहार बंदर के डेवलपमेन्ट के कॉन्ट्रेक्ट को भी खारिज कर दिया गया है। इरान के इस फैसले के पीछे चीन का हाथ होने का दावा हो रहा है। चीन ने पिछले कुछ सालो मे ईरान के साथ सम्बन्ध काफी मजबूत कर लीए है।चीन-ईरान के 25 सालो के आर्थिक व सुरक्षा के करार हो चुके है।

मोदीजी की ईरान यात्रा के बाद तुरंत जून 2016 में चीन के राष्ट्रपति सी.जिंगपिंग ने भी ईरान की यात्रा की। जिसमे 280 बिलियन डॉलर ईरान के तेल उत्पादन के विलास में तथा 120 बिलियन डॉलर सड़क,रेलवे,बन्दरगाह तथा सुरक्षा सम्बंधित क्षेत्रो में इन्वेस्ट करने की बात सामने रखी।कुल मिलाकर 400 बिलियन डॉलर यानीकि 32 लाख करोड़ रुपये का कॉन्ट्रेक्ट। इसके साथ साथ चीन द्वारा ईरान में एयरपोर्ट, 5जी नेटवर्क ,फ़ास्ट बुलेट ट्रेन का ढांचा भी तैयार कर दिया है।इसको देखते हुए लगता है कि चीन इस योजनाओ से ईरान को अपनी तरफ खीच रहा है। आज के दौर में चीन और अमरीका दोनो आमने सामने है और ईरान के सम्बंध भी अमरीका के साथ अच्छे नही है जिसके कारण ईरान को भी चीन का पक्ष लेना ही पड़ेगा।

चीन भारत को आर्थिक रूप से परेशान करने के उपाय सोच रहा है। चाबहार बंदर का डेवलपमेंट का काम चीन के पास जाने का संकेत है। जिससे ईरान से आने वाले तेल के काम मे समस्या आने के संकेत है।पाइपलाइन से भी अगर तेल की इनकमिंग की जाए तो भी इसका कारभार चीन के पास ही रहेगा जो भारत के लिए बिल्कुल अच्छा संकेत नही है।

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