हवाई जहाज की खिड़की गोल और ओवर में छह गेंदे ही क्यों होती है! जानिए रोचक तथ्य

आप जानते हैं कि ट्रेन के जनरल या स्लीपर कोच में गेट के पास वाली खिड़की में दूसरी खिड़कियों के मुकाबले लोहे की ज्यादा रोड क्यों लगी होती है और हवाई जहाज की खिड़की गोल ही क्यों होती है या एक ओवर में छह गेंदे ही क्यों होती है। यह आर्टिकल पूरा पढ़ने के बाद आपको इन सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे। तो चलिए शुरू करते हैं।

अगर आपने ट्रेन में सफर किया है तो आपने देखा होगा कि ट्रेन के कोच में गेट के पास वाली खिड़की में ज्यादा लोहे की रॉड लगी होती है जबकि बाकी खिड़कियों में ऐसा नहीं होता है। इंडियन रेलवे में ऐसा सुरक्षा के लिए किया जाता है। आपको बता दें कि इससे हमारी नहीं बल्कि हमारे सामान की सुरक्षा होती है।

आप यह बात तो जानते ही होंगे कि जब किसी ट्रेन को सिग्नल नहीं मिलते हैं तो उसे प्लेटफार्म से दूर या फिर कहीं सुनसान जगह पर रोक दिया जाता है जब यहां पर ट्रेन खड़ी होती है तो ट्रेन की खिड़की की ऊंचाई जमीन से ज्यादा होती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति चाहे तो वह गेट की सीढ़ियों पर चढ़कर गेट के पास वाली खिड़की में हाथ डाल कर आपके कीमती सामान को चोरी कर सकता है। जैसे कि मोबाइल दोस्तों बस ट्रेन में बैठे यात्रियों के सामान की सुरक्षा करने के लिए इंडियन रेलवे में ऐसा किया जाता है।

इसके अलावा आपने देखा होगा कि हवाई जहाज की जो खिड़की होती है, वह ज्यादातर गोल ही होती है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सोचा है कि यह गोल ही क्यों होती है। हमारे आसपास का जो वातावरण है यानी जो जमीनी वातावरण है, वहां पर हवा का दबाव ज्यादा होता है। ऊंचाई पर हवा का दबाव कम होता है। कहने का मतलब है कि जैसे-जैसे हम ऊंचाई पर जाते हैं, हवा का दबाव भी धीरे-धीरे कम होता जाता है। लेकिन हवाई जहाज के अंदर हवा का दबाव ज्यादा रखा जाता है क्योंकि हमारा शरीर जो जमीनी दबाव के अनुकूल है।

वह ऊंचाई पर जाने पर भी समान दबाव महसूस करें, लेकिन हवाई जहाज के अंदर और बाहर के दबाव में काफी अंतर होता है और इस वजह से खिड़कियों के टूटने की संभावना बनी रहती है।

लेकिन जो गोल खिड़कियां होती है वह ज्यादा दबाव यानी कि प्रेशर झेल सकती है। गोल खिड़कियों का सरफेस गोलाई के केंद्र में होता है और इस वजह से यह ज्यादातर दबाव झेल पाती है। इस वजह से हमारे प्लेन की खिड़कियां गोलााकर या घुमावदार बनायी जाता है। पहले के कई हवाई जहाजों में चौकोर खिड़कियां हुआ करती थी, लेकिन चौकोर खिड़कियां थोड़ी कमजोर होती है। इन खिड़कियों में चौकोर कोने होने की वजह से यह कमजोर हो जाती है या फिर खिड़कियों पर प्रेशर पड़ने पर वह हवा से जल्दी चटक सकती है।

दोस्तों क्रिकेट का अपना ही एक क्रेज है और इंडिया में तो लगभग हर कोई इस गेम का दीवाना है। हर खेल के कुछ नियम होते हैं। ऐसे ही क्रिकेट के कुछ नियम है जिन्हें सभी खिलाड़ियों को फॉलो करना पड़ता है। अगर आप भी क्रिकेट देखते हैं तो आप यह बात तो जानते होंगे कि एक औवर में 6 गेंदे होती है लेकिन एक ओवर में छह गेंद ही क्यों होती है। 4 या फिर 8 गेंदें क्यों नहीं होती है। आपको बता दें कि 1899 तक 5 गेंदों का ही एक ओवर हुआ करता था।

लेकिन सन 1900 के बाद से छह गेंदों के ओवर की शुरुआत हुई तो दोस्तों अगर हम बात करें ऑस्ट्रेलिया की तो ऑस्ट्रेलिया में शुरुआती सालों में 4 गेंदों का एक औवर होता था, लेकिन इसके बाद से इंग्लैंड में 6 गेंदों का एक औवर हुआ तो फिर ऑस्ट्रेलिया में भी 6 गेंदों का एक औवर होने लगा। लेकिन 1922 और 23 के सीजन में ऑस्ट्रेलिया ने 8 गेंदों का एक ओवर करने का फैसला लिया! जो भी इंटरनेशनल मैच होते हैं उनमें 6 गेंदों का ही एक औवर होता है तो दोस्तों हम यह कह सकते हैं कि पहले कुछ देशों ने अपने अपने हिसाब से तय किया कि एक औवर में कितनी गेंदे होंगी लेकिन आजकल के समय में इंटरनेशनल क्रिकेट में 6 गेंदों का ही एक ओवर होता है।

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