मानव शरीर के अंदर क्या उथल-पुथल मचाता है कोरोना वायरस,जानिए इसके बारे में

कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के शरीर में यह वायरस 37 दिन तक जीवित रह सकता है। लांसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। यह अध्ययन करीब आठ सौ संक्रमित लोगों पर किए अध्यन पर आधारित है।

इसका मतलब यह हुआ कि इस बीमारी की चपेट में आने पर ठीक होने में 37 दिन तक का समय लग सकता है। इस बीच स्पेन के एक डॉक्टर ने कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अपनी आप बीती बताई। कोरोना पीड़ितों का इलाज करते वक्त डॉक्टर येल तुंग चेन भी संक्रमित हो गए। फिलहाल वह अपने घर में बने एक वॉर्ड में अकेले रह रहे हैं।

साथ ही बीमारी के दौरान शरीर के अंदर आ रहे बदलावों के बारे में बता रहे हैं। पहले दिन उन्होंने लिखा, ‘मेरा गला और सिर दर्द कर रहा है। खांसी भी आ रही है।’ दूसरे दिन उन्होंने बताया, ‘सीने में दर्द हो रहा है।’ तीसरे दिन उन्होंने बताया कि फेफड़ों में तरल पदार्थ मिला और बुखार तेज हो रहा है।’ चौथे दिन चेन को काफी बुरी तरह से खांसी और थकान महसूस हो रही थी। हालांकि सीने में दर्द कम हुआ।

उधर लांसेट के अध्ययन के अनुसार, वायरस से संक्रमित रहने की न्यूनतम अवधि आठ दिन दर्ज की गई। लेकिन यह बहुत कम लोगों में पाई गई। इसी प्रकार अधिकतम अवधि 37 दिन दर्ज की गई है। यह संक्रमित व्यक्ति के श्वसन तंत्र में मौजूद रहता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि 171 स्वस्थ हो चुके लोगों पर अध्ययन को आधार मानते हुए निर्धारित किया गया है कि वायरस के शरीर में जीवित रहने की अवधि औसत 20 दिन है। अध्ययन में कई किस्म के मरीजों के आंकड़े एकत्र किए गए। यह पाया गया कि जिन 29 मरीजों को उपचार के दौरान एचआईवी/एड्स रोधी दवाएं लोपिनावीर और रिटोनावीर दी गई वे महज 14 दिनों में ठीक हो गए। 

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