संगमरमर से बना है यह मंदिर जैन धर्म का सबसे प्रमुख स्थल

पालिताना मंदिर जैनियों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थान के रूप में माना जाता है। ये शत्रुंजय पहाड़ियों की चोटी पर स्थित ३००० से अधिक मंदिरों का एक समूह है, जो विशेष तौर पर संगमरमर में खुदे हुए हैं। पहाड़ी की चोटी पर मुख्य मंदिर १ तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषिदेवा) को समर्पित है।

पहाड़ी के शीर्ष पर अन्य मंदिर ९०० साल की अवधि में जैनियों की अलग-अलग पीढ़ियों के द्वारा बनाये गये हैं। अन्य प्रमुख मंदिरों में से कुछ कुमारपाल, विमलशाह और सम्प्रीति राजा के हैं। इसकी मान्‍यता के कारण हर जैनी की मनोकामना होती है कि वह जीवन में कम से कम एक बार पहाड़ी चढ़कर मंदिर तक जाये। जैनी यह भी मानते हैं कि कई लोगों ने इस पहाड़ी से ही मोक्ष प्राप्त किया है।

पालिताना का इतिहास राजा उनाद जी की साहसिक गाथाओं से शुरु होता है। राजा उनाद ने सीहोर और भावनगर के राजा से युद्ध कर उन्हें पराजित किया था। शतरुंजया पर्वत पर स्थित जैन मंदिर पहले तीर्थंकर ऋषभदेव को समर्पित हैं। भगवान ऋषभदेव जी को आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है।

पालिताना में कई जैन मंदिर हैं जिनमें आदिनाथ, कुमारपाल, विमलशाह, समप्रतिराजा, चौमुख आदि मंदिर बेहद आकर्षक हैं। संगमरमर एवं प्लास्टर से बने यह मंदिर अपनी नक्काशी व मूर्तिकला के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है।

पालिताना के मंदिर ११वीं एवं १२वीं सदी में बने हैं। इन मंदिरों के बारे में मान्यता है कि ये मंदिर जैन तीर्थंकरों को समर्पित हैं। कई जैन तीर्थकरों ने यहां पर निर्वाण यानि मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण इस क्षेत्र को “सिद्धक्षेत्र” भी कहते हैं।

पालिताना की मान्यता है कि रात के समय भगवान विश्राम करते हैं। इस कारण रात के समय मंदिर को बंद कर दिया जाता है। इन मंदिरों के दर्शन के लिए गए सभी श्रद्धालुओं को संध्या होने से पहले दर्शन करके पहाड़ से नीचे उतरना पड़ता है। आशा करता हूं आपको यह जानकारी पसंद आई होगी।

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