19 साल के इंतजार के बाद कब्र में दफ़न हो सकीं यह बेगम

नवाब और बेगमों के किस्से कहानियों से यूँ तो इतिहास भरा पड़ा है। लेकिन कुछ कहानियाँ लोगों के जुबाँ पर हमेशा बनी रही हैं। ऐसी ही एक दास्ताँ है बेगम आफ़ताब जमानी की। बेगम जमानी आखरी नवाब रजा अली खां की बड़ी बहु तथा नवाब मुर्तुजा अली खां की बेगम थीं। बेगम जमानी का इंतकाल यूँ तो १९९३ में हुआ था लेकिन इनकी लाश २०१२ में पूरे १९ साल बाद दफ्न हो सकी। आखिर इसके पीछे की वजह क्या थी ??? चलिये जानते हैं।

बेगम आफ़ताब जमानी का देहांत १९९३ में हुआ था परन्तु यह दफ़न २०१२ में हो सकीं। उसके पीछे की वजह उनकी ही एक वसीयत थी। वसीयत के मुताबिक बेगम ने मरने के बाद खुद को इराक के कर्बला में दफ़न करने की इच्छा ज़ाहिर की थी।

तब शायद उनको भी नहीं पता था कि उनकी यह इच्छा उनके खुद के मृत शरीर के लिये ही परेशानी का सबब बन जायेगा। दरअसल जिस वक़्त बेगम की म्रत्यु हुयी उस वक़्त इराक में सद्दाम हुसैन की सत्ता थी। इराक के हालात ठीक नहीं थे जिसके चलते बेगम को इराक ले जाने की इज़ाज़त नहीं मिल सकी।

लाश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और इंतजार की घड़ियों को गिनते हुए इसे खासबाग इमामबाड़े में रखा गया। इमामबाड़े के जिस कमरे में इनकी लाश रखी थी वह पूरी तरह सीलबंद था, काःरों तरफ से चिनाई करवा दी गयी थी। यहाँ तक की वहाँ पुलिस भी तैनात की गयी थी।

इस दौरान बेगम के बेटे और बेटी लगातार १८ साल उन्हें इराक ले जाने की कोशिश करते रहे जब इराक के हालात सामान्य हुए तब बागम को दफ़न करने की इज़ाज़त मिल सकी।

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