इसलिए लक्ष्मण जी 14 वर्षों तक लगातार जगे रहे और उर्मिला सोती रहीं,99 % लोग नहीं जानते क्यों

महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भगवान राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण और रामभक्त हनुमान जैसे पात्रों के पराक्रम के बारे में बहुत जगह वर्णन किया गया है। लेकिन रामायण में एक ऐसा पात्र था जिसके त्याग के बारे में काफी कम चर्चा होती है। और ये पात्र कोई और नहीं बल्कि पतिव्रता उर्मिला हैं, आज पौराणिक कहानी में हम उर्मिला के एक ऐसे तप के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे शायद ही कोई जानता हो।

रामकथा के अनुसार जब भगवान राम को वनवास मिला तो भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास की ओर जाने लगे तो उर्मिला ने भी साथ जाने के लिए कहा, लेकिन लक्ष्मण ने साथ रहने पर माता सीता और भगवान राम की सेवा में विघ्न पड़ने की बात करते हुए पत्नी उर्मिला को अयोध्या में रहने का आदेश दिया।


पति के आदेशों का पालन करते हुए कठिन से कठिन समय में भी उर्मिला के आंसू की एक बू्ंद तक नहीं गिरी चाहे वह लक्ष्मण के वनवास जाने का प्रसंग हो या फिर राजा दशरथ की मृत्यु के समय।


वनवास की पहली ही रात को जब राम और सीता सो गए तो लक्ष्मण उन दोनों की देखभाल कर थे। थोड़े ही देर बाद निद्रा देवी ने लक्ष्मण को नींद में जाने के लिए कहा, लेकिन लक्ष्मण ने सोने से माना कर दिया क्योंकि उन्होनें राम और सीता की 14 सालों तक बिना सोए उनकी देखभाल करने की प्रतिज्ञा की थी।
तब लक्ष्मण ने निद्रा देवी से अनुरोध किया की वे जाकर मेरे हिस्से की नींद उर्मिला को दे दे। यह बात जब निद्रा देवी ने उर्मिला को बताई तो वह तुरंत ही तैयार हो गईं। इस प्रकार उर्मिला 14 सालों तक रात और दिन सोती रहीं और लक्ष्मण राम और सीता की सेवा करते रहे, इस तरह से दुख की घड़ी में भी उर्मिला ने अपने पति धर्म को निभाया।

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