इस आइलैंड पर है ऐसा वायरस जो जानदार चीज़ को सड़ा कर मार देता है पूरी जानकारी ज़रूर पड़े

यह ग्रैंड आइलैंड है जो हमारे भारत से 7,750 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जो की 2 किलोमीटर लम्बा और 1 किलोमीटर चौड़ा है यह आइलैंड “ग्रेनार्ड बाए” मे स्थित है हम आपको इस आइलैंड पर घटी एक घटना से अवगत कराने जा रहे है | 

इससे पहले रूसीयों ने वोज्रोहेजेनिय द्वीप द्विपद सुविधा के लिए पहली ईट रखी थी, और उधर अंग्रेज़ ग्रेनार्ड आइलैंड पर विश्व युद्ध के हथियार के रूप में एंथ्रेक्स वायरस को विकसित करने व्यस्त थे इस एंथ्रेक्स वायरस का परीक्षण 1942 में शुरू हुआ और यह एक ऐसा वायरस है जो बहुत तेज़ी से फैलता है और हर जानदार चीज़ को सड़ा के मार देता है |

एंथ्रेक्स का एक अत्यधिक वायरल स्ट्रेन भी है जिसे “वोल्लुम 14578” के रूप में जाना जाता है इन वायरस से एक बम तैयार किया गया और फिर उसका विस्फोट किया गया था और जब वह बम फटा तो उसमे से एक भूरे रंग का घातक धूल का बादल भेड़ो के एक झुंड पर छा गया और इस के बैक्टीरिया ने आइलैंड के वातावरण को दूषित कर दिया 

 जिससे सारी भेड़ मर गई तो उस आइलैंड पर स्थित सेना ने यह जान लिया की वास्तव में जर्मन शहरो को हम इस बम के ज़रिये से कितनी आसानी से दूषित कर सकते है की उन्हें दशंको तक निर्जन बना सके, और इस प्रक्रिया में उन्होने ग्रुइनार्ड आइलैंड को लगभग पांच दशंको तक निर्जन बना दिया था।

1980 के दशक की शुरूआत में जिस आइलैंड पर उन्होने एंथ्रेक्स का परीक्षण किया था वह पूरा आइलैंड एंथ्रेक्स से दूषित हो गया और वह एक सार्वजनिक खतरा बन गया उस समय एक समूह जो अपने आप को अॉपरेशन डार्क हार्वेस्ट कहता था उसने इस आइलैंड की सफाई की मांग करते हुऐ यू. के. भर में द्वीप से सरकारी सुविधाओ के लिए मिट्टी भेजना शुरू कर दिया।

मिट्टी को एंथ्रेक्स के साथ पर्याप्त रूप से दूषित किया गया था और वास्तविक खतरो के लिए देखा गया था |

1986 में सरकार ने फॉर्मेलडीहाइड और समुंदुरी पानी के समाधान के साथ पूरे स्थान को घेरकर ग्रुइनार्ड द्वीप की सफ़ाई शूरु कर दी 1990 तक इस आइलैंड को सुरक्षित घोषित किया गया था | और 1997 में परियोजना के इतिहास को पहली बार घोषित किया गया था |

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