शिव जी और विष्णु जी की पूजा होती है, ब्रह्मा की पूजा क्यों नहीं?

यह कथा तो बहुत प्रचलित है पर पता नहीं आपने सुना है कि नहीं सुना चलिए मैं सुनाती हूं मुझे पता है

एक बार पृथ्वी की भलाई के लिए ब्रह्मा जी ने एक यज्ञ का आयोजन किया यज्ञ की जगह का चुनाव करने के लिए उन्होंने अपने एक कमल पृथ्वी पर भेजा और जिस स्थान पर वह कमल गिरा उसी स्थान पर यज्ञ का होना तय किया गया लोग कहते हैं कि जिस स्थान पर वह कमल गिरा था उसी स्थान पर आज ब्रह्मा जी का मंदिर है

यह राजस्थान के पुष्कर में है जहां भगवान ब्रह्मा जी का सिर्फ एक ही मंदिर है और कहीं संसार में इसका दूसरा मंदिर नहीं है और पुष्प गिरने की वजह से यहां एक तालाब का भी निर्माण हो गया उसके बाद यज्ञ करने के लिए ब्रह्मा जी पुष्कर पहुंचे लेकिन उनकी पत्नी सावित्री ठीक समय पर नहीं पहुंचे एवं यज्ञ का मुहूर्त निकला जा रहा था

अब ब्रह्मा जी क्या करें उन्होंने नंदिनी के मुख से गायत्री मां को उत्पन्न किया और उनसे विवाह कर के यज्ञ शुरू कर दिया इतने में ही मां सावित्री आई और उन्होंने बहुत क्रोधित हो गई कि मेरी जगह पर कोई दूसरी स्त्री कैसे बैठ सकती है

ब्रह्मा जी ने उन्हें लाख समझाने की कोशिश की कि आप देर में आई इसलिए मैंने विवाह कर लिया पर उन्होंने एक न मानी और वह क्रोधित ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि संसार में कहीं भी तुम्हारी पूजा नहीं होगी यह पुष्कर है जहां पर एक मंदिर है

यहीं से तुम्हारी पूजा होगी और संसार में दूसरा मंदिर कोई नहीं बना सकता है जिसने भी यह मंदिर बनवाया उसका विनाश हो जाएगा इसलिए आज तक संसार में कोई भी मंदिर नहीं है फिर पुष्कर में ही एक ऐसा मंदिर है जो ब्रह्मा जी का है इसीलिए लोग ब्रह्मा जी की पूजा नहीं करते हैं श्राप के कारण

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