ऐसे भी फैला हो सकता है SARS-CoV-2

वुहान से फैला कोविड- 19 संक्रमण का वायरस एक बायोवेपन नहीं है, बल्कि यह चीन के प्रयासों का नतीजा है। जिसमें वह किसी वायरस से लड़ने की अपनी क्षमता को अमेरिका जितना या उससे ज्यादा बढ़ाना चाहता था। वहीं, लैब में किसी गलती या सुरक्षा मानदंडो की कमी होने की वजह से इसस कोई कर्मचारी संक्रमित हुआ होगा और उसी से यह वायरस पास की ‘वेट मार्केट’ में फैला होगा।

लोगों द्वारा कोरोना वायरस को बायोलॉजिकल वेपन मानने के पीछे कई किताबें, कथित भविष्यवाणियों आदि का हाथ है। जिसमें से एक 1981 में प्रकाशित हुई एक नोवल जिसका नाम ‘द आईज ऑफ डार्कनेस’ है। इसमें एक वायरस की बात की गई थी। जो देखने और सुनने में बिल्कुल मौजूदा कोरोना वायरस की तरह लगता है और इसे भी कोरोना वायरस की भविष्यवाणी माना गया था।

सबसे खास बात यह है कि इसमें इस वायरस के रूप के साथ-साथ पनपने की भी सही जगह लिखी है और जो कि चीन का शहर वुहान। इस किताब के लेखर डीन कूंट्ज ने एक चैप्टर में लिखा है कि वुहान के बाहरी इलाके में स्थित एक लैब में वुहान-400 नामक एक बायोलॉजिकल वेपन बनाया गया।

जो कि लोगों में सांस संबंधी प्रणाली को नुकसान पहुंचाकर मार देता है। लेकिन, यह सभी जानकारी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद कोरोना वायरस के प्रकार से जोड़ी जा रही हैं। जिसका कोई भी आधिकारिक सबूत नहीं है। इसलिए, ऐसी किसी भी जानकारी पर विश्वास करना आपमें और समाज में डर का माहौल फैला सकता है।

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