पढ़े मजेदार कहानी, कामचोरी करके फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए।

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक राजा अपने पूरे परिवार के साथ रहता था। उस राजा का नाम राजा प्रताप था। राजा बहुत ही बहादुर, ईमानदार, दयालु और न्यायप्रिय था। उसके नाम के चर्चे दूर दूर तक प्रसिद्ध थे। एक बार राजा अपनी बहन सुकन्या को भाईदूज के मौ़के पर उसे कुछ तोहफा देना चाहता था पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह उसे क्या दे। फिर उसे अचानक ख्याल आता है कि वह अपनी बहन के लिए एक महल बनवाएगा और वह महल अपनी बहन को भाईदूज के दिन तोहफे में दे देगा।

वह अपने महल के निर्माण के लिए अजय और विजय नाम के दो मित्रों को बुलाता है। अजय और विजय के अलावा महल के निर्माण कार्य में गांव के और भी बहुत से लोग लग जाते है। अजय बहुत ही मेहनती और ईमानदार था। वह बहुत ही मेहनत से काम करता था और विजय बहुत ही आलसी था। वह काम करने के नाम पर जाता था परन्तु काम करने का छोड़ कर पास के एक पेड़ के नीचे छाव में सोते रहता और जैसे ही शाम होता सभी काम करके राजा के पास अपनी अपनी मजदूरी लेने चले जाते। राजा सभी को मजदूरी उनके काम के हिसाब से ही देता था। राजा सबसे पूछता था कि किसने कितना काम किया है जो जैसा बताता राजा उसको उसी हिसाब से पैसे देता ।

सभी जैसा काम करते इमानदारी से उस हिसाब से ही पैसे ले लेते पर विजय सुबह से लेकर शाम तक कुछ भी नहीं करता और राजा से सबसे ज्यादा पैसे ले लेता यह कहकर कि उसने सबसे ज्यादा काम किया है। अजय के अलावा कोई नहीं जानता था कि विजय कुछ काम नहीं करता है और राजा से मुंहमांगी रकम के लेता है। अजय और विजय के बीच बहुत गहरी दोस्ती थी इसलिए अजय विजय के विषय में राजा को कुछ नहीं बताता है। विजय को लगता था कि राजा को कभी भी उसकी कामचोरी के बारे में पता नहीं चलेगा इसलिए वह अजय के बहुत समझाने पर भी उसकी बात नहीं मानता और हर दिन काम करने के जगह सोते रहता।

उसे लगता है कि जब मुझे बिना परिश्रम के ही फल मिल रहा है तो मैं परिश्रम क्यों करूं। अजय उसे बताता है कि बिना परिश्रम के हमेशा फल की चाह नहीं की जा सकती पर विजय उसकी बातों पर ध्यान नहीं देता है। एक दिन राजा यह देखने निकलता है कि क्या सभी महल का काम ठीक से कर रहे है या नहीं । राजा यह भी देखना चाहता था कि क्या कोई कामचोरी तो नहीं करता।राजा सभी को ठीक से काम करता हुआ देखता है पर राजा विजय को कहीं नहीं देखता है।

राजा सोचता है कि विजय मुझसे सबसे ज्यादा मजदूरी लेता है यह कहकर कि वह सबसे ज़्यादा काम करता है। यह सोचते सोचते राजा उस जगह पहुंच जाता है जहां पर विजय सो रहा होता है। राजा विजय को सोते देख बहुत क्रोधित हो जाता है। राजा अजय ओर विजय दोनों को महल में बुलाता है और विजय से कहता है कि तुम हर दिन मुझसे काम के नाम पर सबसे ज्यादा पैसे लेते रहे और ये तुम्हारा दोस्त अजय रोज मेहनत से काम करता था और जितना काम करता था उतना ही पैसा लेता था । अजय चाहता तो वह भी ज्यादा पैसे ले सकता था पर उसने कभी भी बेईमानी नहीं की। तुम इतने दिनों तक काम के नाम पर मेरे साथ धोखा करते रहे। राजा विजय को दण्ड देते हुए कहता है कि के तुम गांव छोड़कर चले जाओ। विजय को अपनी गलती का एहसास हो जाता है और उसे समझ भी आ जाता है कि अजय ने उससे ठीक ही कहा था कि “बिना परिश्रम के हमेशा फल की चाह नहीं कि जा सकती”। विजय राजा से माफी मांगता है पर राजा उसे माफ करने को तैयार नहीं था।

अजय को विजय के लिए बहुत बुरा लगता है इसलिए वह भी राजा से विनती करने लगता है कि वह विजय को माफ कर दे। अजय के विनती करने पर राजा विजय को माफ कर देता है और दोबारा काम पर रख लेता है। उसके बाद विजय अजय कि तरह ही मेहनत और ईमानदारी से काम करना शुरू कर देता है। कुछ महीनों बाद महल तैयार हो जाता है। राजा अपनी बहन को वह महल उपहार के रूप में दे देते है।

इस कहानी से हम यह सीख मिलती है कि कभी भी कामचोरी करके फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए।

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