श्री कृष्ण के जीवन की इन शिक्षाओं को ग्रहण कर जीवन सफल बनाएं

श्री कृष्ण की जीवन लीला त्रेता युग से ही लोगों के लिए जीने कि प्रेरणा बनकर उनके जीवन को सफल बना रहा है और आज भी उनके जीवन के उपदेशों को अपनाकर मनुष्य कल्याण को प्राप्त कर रहा है।

बचपन में श्री कृष्ण एक अबोध बालक के रूप में रहकर अपने लोगों की हर तरह से सेवा की, श्री कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ और माता देवकी और नन्द बाबा के आश्रय में पले बढ़े और शिक्षा दीक्षा ग्रहण की,

आकाशवाणी हुई थी कि महाराज कंस की बहन देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा इसलिए कंस ने सोचा यदि देवकी को कारागार में बंद कर देंगे तो देवकी का आठवां पुत्र पैदा ही नहीं होगा और फिर उसका वध भी नहीं होगा,लेकिन कारागार में भारी सुरक्षा के बीच भी कारागार में श्री कृष्ण का जन्म हुआ और सारे प्रहरी मूर्छित हो गए और श्री कृष्ण को डाली में रखकर नन्द बाबा के घर पहुंचा दिया गया।

श्री कृष्ण बचपन में श्री कृष्ण की लीलाओं के कई किस्से आपने सुने होंगे माता यशोदा को परेशान करना, ग्वालों के साथ खेलना, गोपीकाओं को स्नान करते हुए कपड़े उठा लाना और पूरे गांव को अपने लीलाओं से रिझाए रहते थे

कंस श्री कृष्ण को मारने के लिए हर प्रयत्न करता है लेकिन श्री कृष्ण जो तीनों लोकों के स्वामी हैं वो सभी समस्याओं को पार करके अपनी और अपने गांव के लोगों की हर तरह से रक्षा करते हैं।

जब कंस को पता चलता है तो वह कृष्ण को नवजात शिशु के रूप में खत्म करने के लिए पूतना नामक राक्षसी को भेजा था जिसने दूध पिलाने के बहाने श्री कृष्ण को घनघोर जंगल में ले गई और वहां श्री कृष्ण को मारने का प्रयत्न किया लेकिन प्रभु ने अपने नन्ही नन्ही भुजाओं से उस पूतना का वध कर दिया।


श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की कहानियां तो सर्वत्र व्याप्त हैं और इन्हीं लीलाओं के कारण श्री कृष्ण का बाल वर्णन करने से कोई भी कवि खुद को रोक नहीं पाया है, बचपन में ग्वाल बालों के साथ श्री कृष्ण गांव की गोपियों के घर में जाकर माखन की चोरी करते और जैसे ही किसी के आने की आहट सुनाई देती तो सबको लेकर कैसे छुप जाते जब पकड़े जाते तो गोपियां उनको लेकर माता यशोदा के पास लेकर जाती लेकिन मां यशोदा को मनमोहन अपनी बाल लीलाओं में उलझा लेते।

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