जानिए कार का इंश्योरेंस कराते समय इन 7 आदतों का जरूर रखें ध्यान

1.आईडी की : ये वह अधिकतम राशि है जो कार चोरी या क्षतिग्रस्त होने पर क्लेम कर सकते हैं। आईडीवी कार की प्राइस से अवमूल्यन घटा तय किया जाता है। कार 5 साल से ज्यादा पुरानी है तो आपसी समझौते से कार की कीमत तय की जाती है।

2. कवरेज: यह दो हिस्सों में होता है। पहला थर्ड पार्टी जो नुकसान में पीड़ित परिवार को मुआवजा देता है। दूसरा वैकल्पिक डैमेज कवर; यह चोरी, एक्सीडेंट, आग, प्राकृतिक आपदा आदि में नुकसान से सुरक्षा प्रदान करता है।

3. एड ऑन/टॉप अप: यह कुछ अतिरिक्त पैसे देकर अधिक सुविधाएं लेने जैसा है। मिसाल के तौर पर इंजन प्रोजेक्ट, जीरो डेप, 24*7 रोडसाइड असिस्टेंस आदि। हम अपनी जरूरत के हिसाब से राइडर चुन सकते हैं।

4. अपवादः हमें पता होना चाहिए कि पॉलिसी में क्या कवर है और क्या नहीं? यह हमारा हक और कर्तव्य दोनों है। बीमा लेने से पहले हमें इंश्योरेंस कंपनी से एक एक चीज स्पष्ट कर लेनी चाहिए।

5. कटौती राशि: इसका मतलब है कि क्लेम के समय हम पहले से तय एक हिस्सा खुद वहन करेंगे। अगर आप ज्यादा कटौती पर सहमत हैं तो पुलिस की कीमत उसी अनुपात में कम हो जाती है।

6. क्लेम में आसानी: आजकल क्लेम निस्तारण प्रक्रिया बहुत ही आसान और तेज हो गई है। कई कंपनियां तो आपके दरवाजे पर ही यह सुविधा दे रही हैं। बीमा करते समय यह देखना फायदेमंद रहेगा कि कंपनी कितनी टेक्नो फ्रेंडली है।

7. बीमा कंपनी का नेटवर्क: यह पता लगा लेना बहुत महत्वपूर्ण है कि हम जिस कंपनी से बीमा करा रहे हैं, उसका नेटवर्क हमारे शहर या आसपास कितना मजबूत है। जैसे गैराज या सर्विस सेंटर्स से उसका टाइम आदि।

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