जानिए गर्भ में बच्चे के मरने का कारण

जब किसी कपल को पता चलता है कि वे प्रेगनेंट हैं और पैरंट्स बनने वाले हैं तो उनके लिए इससे बढ़कर खुशी का पल और कोई नहीं होता। कई महीनों तक शिशु को अपने गर्भ में पालना, उसकी हलचल, दिल की धड़कन सभी चीजों को महसूस करना और फिर एक दिन अचानक शिशु का दुनिया में आने से पहले ही चले जाना- शिशु में जीवन के कोई संकेत न दिखना ही स्टिल बर्थ कहलाता है और यह सिर्फ होने वाली मां के लिए ही नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए किसी दुख और तकलीफ से भरा सदमे से भरा पल होता है।

ज्यादातर मामलों में स्टिल बर्थ होने के पीछे क्या कारण है या इसे होने से रोका जा सकता था या नहीं इसका पता नहीं चल पाता है। गर्भावस्था के 20 हफ्ते से लेकर प्रसव तक के बीच में अगर कभी भी प्रेगनेंसी अचानक खत्म हो जाए या शिशु का मृत जन्म हो तो इसे ही स्टिल बर्थ कहा जाता है। इस शब्द का इस्तेमाल उन शिशुओं के लिए भी किया जाता है जिनकी मृत्यु डिलिवरी के दौरान हो जाती है। 20 हफ्ते से पहले अगर प्रेगनेंसी किसी वजह से खत्म हो जाए तो इसे मिसकैरेज कहा जाता है।

गर्भ में बच्चे के मरने का कारण? –
दुर्भाग्यवश, ज्यादातर मामलों में यह पता ही नहीं चल पाता कि आखिर स्टिल बर्थ यानी मृत शिशु का जन्म क्यों हुआ। बावजूद इसके कई फैक्टर्स और कारण हैं जो स्टिल बर्थ के रिस्क को बढ़ाने का काम करते हैं, जैसे:

प्रेगनेंसी और लेबर से जुड़ी जटिलताएं

प्रेगनेंसी के दौरान अगर कुछ ऐसी घटनाएं हो जाएं जो शिशु के लिए जन्म से पहले खतरनाक हो तो इससे भी स्टिल बर्थ होने का खतरा रहता है जैसे- प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले अगर लेबर पेन शुरू हो जाए, 42 हफ्ते से ज्यादा चलने वाली प्रेगनेंसी, अगर गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे पल रहे हों, प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की दुर्घटना हो जाए या गर्भवती महिला को चोट लग जाए।

प्लैसेंटा से जुड़ी समस्याएं

गर्भवती महिला के गर्भाशय में मौजूद प्लैसेंटा गर्भ में पल रहे शिशु को ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है। ऐसे में अगर कोई भी चीज इसके बीच में आकर रूकावट डालने की कोशिश करे तो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरा हो सकता है। प्लैसेंटा से जुड़ी समस्याएं दुनियाभर में होने वाली सभी स्टिल बर्थ की घटनाओं में से एक चौथाई के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। प्लैसेंटा से जुड़ी समस्याओं में खून का सही तरह से न बहना, सूजन और जलन, इंफेक्शन आदि शामिल हैं। कई मामलों में प्लैसेंटा, प्रसव से पहले ही गर्भ की दीवार से अलग हो जाता है जिसे प्लैसेंटल अबरप्शन कहते हैं। इस वजह से भी स्टिल बर्थ का खतरा रहता है।

जन्मजात दोष या कई दूसरी समस्याएं

अमेरिका की नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ ऐंड ह्यूमन डिवेलपमेंट के आंकड़ों की मानें तो हर 10 में से 1 स्टिल बर्थ गर्भ में पल रहे शिशु को जन्मजात दोष होने की वजह से होता है। ये समस्याएं हैं- भ्रूण के विकास में अवरोध, जीन्स से जुड़ी समस्याएं, Rh का असामंजस्य, भ्रूण की बनावट में किसी तरह का दोष आदि। जीन्स से जुड़ी दिक्कतें गर्भधारण के वक्त ही होती हैं। दूसरे तरह के जन्मजात दोष के पीछे वातावरण से जुड़े कारक जिम्मेदार होते हैं। कई गंभीर जन्मजात दोष या एक साथ कई जन्मजात दोष होने पर शिशु के लिए जीवित रहना मुश्किल हो जाता है।

इंफेक्शन

अगर गर्भवती महिला, गर्भ में पल रहे शिशु या प्लैसेंटा में किसी भी तरह का इंफेक्शन या संक्रमण हो जाए तो इस वजह से भी स्टिल बर्थ यानी शिशु के मृत जन्म लेने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 24 हफ्ते की प्रेगनेंसी के दौरान जो इंफेक्शन हो सकते हैं वे हैं- साइटोमेगालोवायरस (सीएमवी), जेनिटल हर्प्स, लिस्टेरिओसिस, साइफिलिस, टोक्सोप्लासमोसिस आदि।

गर्भनाल में किसी तरह की दिक्कत

अगर प्रेगनेंसी के दौरान गर्भनाल (अम्ब्लिकल कॉर्ड) में गांठ बन जाए या वह किसी वजह से दब जाए तो गर्भ में पल रहे शिशु तक जरूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। गर्भनाल से जुड़ी समस्याओं की वजह से प्रेगनेंसी के अडवांस स्टेज में स्टिल बर्थ यानी मृत शिशु के जन्म लेने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

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