जानिए ब्रेस्ट मिल्क में खून आने के सबसे बड़े कारण

निप्पल के क्रेक होने की वजह से भी ब्रेस्ट के मिल्क में ब्लड आने की समस्या हो सकती है। निप्पल के क्रेक होने की वजह से शिशु को स्तनपान करवाने में मां को परेशानी होने के साथ-साथ शिशु भी ठीक तरह से स्तनपान नहीं कर पाता है। यही नहीं इस दौरान स्तन में खुजली होना, फफोले होने के साथ-साथ अन्य परेशानी हो सकती है।

डैमेज केपिलरी का अर्थ है स्तन की कोशिकाओं (सेल्स) से जुड़ी हुई परेशानी। स्तनपान करवाने वाली महिला के मिल्क का कलर अगर भूरा या लाल होने लगे तो यह डैमेज सेल्स की ओर इशारा करता है। यह परेशानी वैसे तो कुछ दिनों में ही खुद से ठीक हो जाती है लेकिन, अगर ऐसा लगातार होने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और घरेलू इलाज से बचना चाहिए।

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार 5 प्रतिशत से भी कम महिलाओं में पगेट्स डिजीज की समस्या हो सकती है। मिल्क डक्ट से जुड़ी परेशानी को पगेट्स डिजीज कहते हैं। इस वजह से ब्रेस्ट कैंसर की भी संभावना बढ़ जाती है। हालांकि ब्रेस्ट कैंसर से डरना नहीं चाहिए बल्कि अगर आपको ऐसी कोई परेशानी समझ आती है, तो जल्द से जल्द इसका इलाज शुरू करवाना चाहिए।

फिब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट का अर्थ हैं स्तन में गांठ आना। यह परेशानी सिर्फ एक स्तन में भी हो सकती है या दोनों में भी हो सकती है। फिब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट की समस्या ज्यादतर 30 वर्ष से ज्यादा की महिलाओं में होती है। फिब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट होने की वजह से भी ब्रेस्ट मिल्क में खून आने की समस्या हो सकती है।

इंट्राडक्टल पेपिलोमा मिल्क डक्ट में होता है और यह एक तरह का लंप होता है। यह परेशानी सबसे पहले मिल्क डक्ट में शुरू होती है, जिस वजह से शिशु को स्तनपान करवाना संभव भी नहीं होता है। इंट्राडक्टल पेपिलोमा होने पर निप्पल से मिल्क बाहर नहीं आ पाता है। धीरे-धीरे ये लंप स्तन के दूसरे हिस्से में भी फैल जाता है।

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