जानिए उम्र के हिसाब से एक दिन में कितने घंटे सोना चाहिए

नींद का अभाव भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 93% भारतीय ज़रूरत से कम नींद पाते हैं। बदलती जीवन शैली और आधुनिक गैजेट्स के हमारे जीवन में आने से स्थिति और खराब ही हुई है। किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय के डॉक्टरों का कहना है, अकेले लखनऊ जिले में, सोने के विकार से प्रभावित लोगों की संख्या 40 लाख से अधिक हो सकती है।

अमेरिका के नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति (18-64 वर्ष) को दिन में 7 से 9 घंटे की नींद मिलनी चाहिए। उस से अधिक उम्र के होने पर (64 वर्षों से अधिक) 7 से 8 घंटे की नींद आवश्यक है। किशोरों को लगभग 9 से 10 घंटे की आवश्यकता होती है, जबकि स्कूल-आयु वर्ग के बच्चों और 5 वर्ष के बच्चों को और भी अधिक नींद की आवश्यकता होती है।

लेकिन जैसा कि अब शोध में देखा जा रहा है, आपकी उम्र के अलावा भी दूसरे फ़ैक्टर आपकी नींद की ज़रूरतों पर असर करते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण फ़ैक्टर है लिंग या जेंडर। और काफ़ी स्पष्ट रूप से देखा गया है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक सोना चाहिए!

अधिक मानसिक ऊर्जा का उपयोग है खराब नींद का कारण
नेशनल स्लीप फाउंडेशन जैसे नींद विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं द्वारा अधिक मानसिक ऊर्जा का इस्तेमाल करना अधिक नींद की आवश्यकता का एक कारण है। उनके अनुसार, महिलाएं अपने दिमाग़ का अधिक मात्रा में उपयोग करती हैं और एक समय पर कई कार्य भी करती हैं। इससे अधिक मानसिक ऊर्जा की खपत होती है जिसके कारण जब नींद के दौरान मस्तिष्क को फिर से जीवंत करने की बात आती है, तो अधिक नींद की आवश्यकता होती है।

अक्सर महिलाओं की नींद की क्वालिटी कम होती है
एक और कारण यह है कि महिलाओं को थोड़ा अधिक इसलिए सोना पड़ता है क्योंकि अक्सर उन्हे जो नींद प्राप्त होती है, वह उतनी अच्छी नहीं होती है। कुछ जीवन चरण और शारीरिक परिवर्तन महिलाओं में कम सुकूनदायक नींद के कारण बनते हैं। वास्तव में, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को वयस्कता में अनिद्रा और खराब नींद अधिक होने की संभावना होती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन द्वारा किए गये एक सर्वेक्षण में 63 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे हर हफ्ते अनिद्रा का अनुभव करती हैं।

रजोनिवृत्ति के दौरान अच्छी नींद नहीं आती है
रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाएं बहुत अशांत नींद महसूस करती हैं। खराब नींद को एकदम से बेहद गर्मी लगना (हॉट फ्लैश) या रात में पसीने से तरबदार होने जैसे रजोनिवृत्ति से जुड़े अन्य लक्षणों से भी जोड़ा गया है।

प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी नींद नहीं आती है
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तनों के साथ-साथ शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन भी हो सकते हैं जिनके कारण अच्छी नींद नहीं आती है। असुविधा के अलावा, अधिक बार पेशाब करना पड़ता है और टाँगों में ऐंठन भी गर्भवती महिला के लिए एक अच्छी रात की नींद मुश्किल बना सकती है।

मासिक धर्म के दौरान नींद बिगड़ जाती है
अक्सर मासिक धर्म की वजह से पेट में ऐंठन, दर्द, मनोदशा का बिगड़ना और आहार में असंतुलन होता है। इन कारणों से प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में महिलाओं को सुकूनदायक नींद नहीं मिलती है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के कारण नींद खराब होती है
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के कारण पैरों को स्थाई रखना लगभग असंभव हो जाता है और इसके लक्षण शाम और रात में ज़्यादा तीव्र होते हैं। इसके नतीजे इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को ढंग से नींद आना बहुत मुश्किल होता है। अनुसंधान के मुताबिक, महिलाओं को रेस्टलेस लेग सिंड्रोम होने की अधिक संभावना है। कहा जाता है कि महिला हार्मोन और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के बीच एक गहरा नाता है।

ओवरी में सिस्ट (पीसीओएस या PCOS) की वजह से नींद ठीक नहीं आती है
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को निरोधक स्लीप एपनिया होने की अधिक संभावना होती है। इस बीमारी में ऊपरी वायुमार्ग अवरुद्ध हो जाता है, जिसके कारण आपको रात को श्वास लेने में कठिनाई होती है। इसके नतीजे आप खर्राटे मारना शुरू कर सकते हैं और आपको ठीक से नींद भी नहीं आती है।

अनिद्रा के अन्य कारक
कुछ विकार या बीमारियां अनिद्रा को विकसित करने की संभावना को बढ़ाते हैं। दुर्भाग्य से, इनमें से कई बीमारियाँ महिलाओं में अधिक आम हैं – जैसे चिंता, अवसाद, या फाइब्रोमाइल्जी।

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