GPS का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल डाटा चालू क्यों करना पड़ता है जब कि यह सैटेलाइट से चलने वाली तकनीक है?

आधुनिक स्मार्टफोन की सबसे अच्छी विशेषताओं में से एक जीपीएस है जिससे यह निर्धारित किया जा सकता है कि आप कहा हैं, आप कहाँ होना चाहते हैं, और वास्तव में वहाँ कैसे पहुंचे ।

इस जादू का नाम है जीपीएस यह लगभग हर फ़ोन में होता है। आपको (अक्सर 5 मीटर की सटीकता के साथ!) पिनअप करने के लिए कई मशीनें एक साथ काम करती हैं और सॉफ्टवेयर समझदारी से सबसे अच्छा तरीका चुनता है। यदि आपको नेविगेशन के लिए बहुत सटीक स्थान की जानकारी की आवश्यकता है, तो जीपीएस को आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। जिस तरह से यह काम करता है वह काबिले तारीफ है।

जीपीएस का पूरा नाम ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम है। यह अमेरिकी तकनीक है और देश की वायु सेना द्वारा इसकी देखरेख की जाती है। इसका उपयोग आम आदमी भी कर सकता है जीपीएस एक रेडियो नेविगेशन प्रणाली है। यह किसी भी सॉफ्टवेयर को स्थान और समय की जानकारी प्रदान करने के लिए आपके फोन के अंदर रिसीवर और उपग्रह के बीच रेडियो तरंगों का उपयोग करता है। आपको अपनी लोकेशन जानने लिए जीपीएस को कोई वास्तविक डेटा भेजने की आवश्यकता नहीं होती है; आपको केवल उन 28 उपग्रहों। (जीपीएस उपग्रह) में से चार या अधिक से डेटा प्राप्त करने की आवश्यकता होती है जो जियोलोकेशन उपलव्ध कराती है।

हम दो टाइप के जीपीएस यूज करते हैं

१-पहला जीपीएस- जो केवल सैटेलाइट से चलता है

इसका उपयोग मछुवारे और हवाई/पानी जहाज करते है

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२-AGPS असिस्टेड ग्लोबल पोजिशनिंग

हम अपने फॉन में AGPS – (असिस्टेड ग्लोबल पोजिशनिंग) सिस्टम का उपयोग करते हैं जीपीएस रेडियो बहुत अधिक पावर का उपयोग करते हैं , आपको हर बार नए डेटा भेजने में एक मिनट तक का समय लग सकता है। चूंकि आप इस स्टेप पर हम आमतौर पर अपना लोकेशन जानना चाहते हैं, AGPS जियोलोकेशन की सहायता से सेलुलर टॉवर से डेटा ग्रहण करता है।(सेल्यूलर टावर से जिओ लोकेशन डाटा ग्रहण करने के लिए सक्रिय डाटा प्लान की आवश्यकता होती है) डाटा मिलने बाद हमारा फोन जान जाता है हमारी लोकेशन कहा है हमारा फोन तीन या इससे अधिक टावरों का इस्तेमाल करता है और सिग्नल के ओवर लपिंग के सिद्धांत पर हमरी लोकेशन बताता है

बिल्कुल इस चित्र कि तरह

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। यह कितना सटीक है यह आपके फोन और टॉवर के बीच सिग्नल की ताकत पर निर्भर करेगा, लेकिन आमतौर पर, यह स्थान डेटा के लिए उपयोग किए जाने के लिए पर्याप्त है। आपके फ़ोन का सॉफ़्टवेयर इस सेलुलर स्थान डेटा को GPS रिसीवर को भेजता है जो समय-समय पर जीपीएस डेटा और सेलुलर स्थान के बीच स्विच करेगा ताकि वास्तविक समय में बहुत सटीकता से लोकेशन (50 मीटर या इसके भीतर) प्राप्त किया जा सके। जब भी जियोलोकेशन की स्थिति जीपीएस उपग्रहों से प्राप्त होती है, तो आपका लोकेशन बहुत ही सटीकता से पता हो जाता है;

सीधे सीधे कहे तो

AGPS सबसे पहले नजदीकी सेलुलर टावरों से जियो लोकेशन का डाटा ग्रहण करता है तथा जीपीएस सैटेलाइट से आने वाले डाटा को मर्ज करके ए एक सटीक लोकेशन बनाता है ( सेलुलर टावर से जियो लोकेशन डाटा लेने के लिए सक्रिय डाटा प्लान की आवश्यकता होती है ।

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