पेशाब से झाग आना हो सकता है इन सब बीमारियों का संकेत

पेशाब करते समय अधिक झाग बनना आमतौर पर एक साधारण स्थिति होती है। यह अक्सर पेशाब का दबाव अधिक होने पर पड़ने वाली तीव्र धार से या फिर टॉयलेट शीट को साफ करने के लिए इस्तेमाल किए गए विभिन्न केमिकलों के कारण होता है। इनके अलावा स्वास्थ्य से संबंधित कुछ समस्याएं भी हैं, जो इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। यह अक्सर डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और गुर्दे के मरीजों में देखी जाती है।

जब गुर्दे किसी कारण से ठीक से काम नहीं कर पाते हैं, तो वे पेशाब में अपशिष्ट पदार्थों के साथ-साथ प्रोटीन को भी शरीर से बाहर निकालने लग जाते हैं। कुछ विशेष प्रकार के प्रोटीन हवा के संपर्क में आकर अधिक झाग बनाते हैं और यह समस्या हो जाती है। इस स्थिति की रोकथाम करने का कोई विशेष उपाय नहीं है, लेकिन जीवनशैली में सुधार करके इसका कारण बनने वाले रोग विकसित होने से बचाव किया जा सकता है।

ज्यादातर मामलों में इस स्थिति का इलाज करवाने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि यह अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन इसका कारण बनने वाले कुछ अंदरूनी रोगों का इलाज करना आवश्यक होता है। यदि आपको पेशाब में झाग आने के कारण परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर स्थिति के कारण के अनुसार इसका इलाज कर सकते हैं। बहुत ही कम मामलों में पेशाब में झाग आने से स्वास्थ्य पर कोई गंभीर प्रभाव पड़ता है।

पेशाब से झाग आने के कारण –
अधिक तीव्रता से पेशाब आना ही पेशाब में झाग बनने का सबसे मुख्य कारण होता है। क्योंकि तीव्र धार जब नीचे टकराती है, तो अधिक झाग बनने लगती है। यह एक सामान्य स्थिति होती है और जल्दी ही अपने आप ठीक हो जाती है, इसका स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या से कोई संबंध नहीं होता है।

लेकिन कुछ मामलों में धीरे-धीरे पेशाब करने पर भी झाग बन सकती है, जो पेशाब में अधिक प्रोटीन जमा होने के कारण होता है। पेशाब में प्रोटीन आने की स्थिति को प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है। एल्बुमिन एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जब पेशाब में इसका स्तर बढ़ जाता है तो यह हवा के साथ प्रतिक्रिया करता है और झाग बनने लगती है। पेशाब में प्रोटीन आने की समस्या गुर्दों से जुड़ी होती है। गुर्दों का कार्य शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करके शरीर से बाहर निकालना होता है। कुछ असाधारण स्थितियों में किडनी प्रोटीन को भी पेशाब के साथ निकालने लग जाती है।

पुरुषों में स्खलन से संबंधित समस्याएं भी पेशाब में झाग आने का कारण बन सकती है। रेट्रोग्रेड इजैक्युलेशन एक ऐसी समस्या है, जिसमें स्खलन के दौरान वीर्य बाहर की तरफ निकलने की बजाय वापस मूत्राशय में जाने लगता है। ऐसी स्थिति में वीर्य पेशाब में मिल जाता है और पेशाब करने पर अधिक झाग बनने लगती है।

इसके अलावा कुछ दवाएं भी है, जो पेशाब से अधिक झाग आने जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। फीनेजोपेराइडिन (पाइरीडियम, एजेडओ स्टैंडर्ड, यूरिस्टैट) आदि दवाएं हैं, जो कुछ दुर्लभ मामलों में पेशाब में झाग आने का कारण बन सकती हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल यूटीआई (मूत्रमार्ग में संक्रमण) का इलाज करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, पेशाब में झाग आना हर बार शरीर से जुड़ी समस्या नहीं होती है। कई बार टॉयलेट शीट में भी कुछ प्रकार के केमिकल होने के कारण झाग बन सकती है। टॉयलेट शीट को साफ करने वाले कुछ उत्पादों में ऐसे केमिकल पाए जाते हैं, जो पेशाब करने पर अत्यधिक झाग पैदा कर सकते हैं। ऐसे में यदि आपको झाग महसूस हो रही है, तो पहले उसकी अच्छे से पुष्टि कर लें।

पेशाब में झाग आने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ मामलों में (डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के मरीजों) भी पेशाब में झाग बनने का खतरा बढ़ जाता है। अत्यधिक मानसिक और शारीरिक तनाव भी इसका एक जोखिम कारक है, ऐसा इसलिए अधिक चिंता और तनाव से शारीरिक अंग ठीक से काम करना बंद कर देते हैं।

पेशाब में झाग आने का बचाव –
यदि पेशाब में झाग आना किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण हुआ है, तो इसके अंदरूनी कारण का इलाज करके ही इसकी रोकथाम की जा सकती है। इसके अलावा अपनी जीवनशैली में सुधार करके और अच्छी आदतें अपनाकर ऐसी समस्याएं होने के खतरे को बढ़ाया जा सकता है। निम्न कुछ स्वास्थ्य सुझाव दिए गए हैं, जिनकी मदद से किडनी समेत शरीर के अन्य अंगों को स्वस्थ बनाया जा सकता है और पेशाब में झाग आने जैसी समस्याओं को दूर किया जा सकता है –

नियमित रूप से व्यायाम करना
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना
अपने आहार में ताजे फल व सब्जियों को शामिल करना
बाहर का खाना और तला हुआ खाना खाने से बचना
नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाते रहना

पेशाब से झाग आने का परीक्षण –
डॉक्टर पेशाब में झाग आने की स्थिति व उसके कारण का पता लगाने के लिए यूरिन सैंपल लेंगे। यदि पेशाब में प्रोटीन की अधिक मात्रा है, तो टेस्ट की मदद से उसका पता लगाया जा सकता है। प्रोटीन अधिक मिलने पर डॉक्टर 24 घंटे तक यूरिन का सैंपल जमा करके उसकी जांच भी कर सकते हैं। ऐसा करने से यह पता लगा जाता है कि कहीं प्रोटीन का प्रभाव लंबे समय से तो नहीं हो रहा है। ऐसा करने के लिए मरीज को एक बड़ा कंटेनर दिया जा सकता है, जिसमें 24 घंटे का पेशाब जमा किया जाता है।

लैब में पेशाब के सैंपल में एल्बुमिन के स्तर की तुलना क्रिएटिनिन के स्तर से की जाती है। एल्बुमिन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है, जबकि क्रिएटिनिन किडनी के द्वारा अपशिष्ट पदार्थ के रूप में शरीर से निकाला गया पदार्थ होता है। यदि व्यक्ति के यूरिन सैंपल में एल्बुमिन का स्तर क्रिएटिनिन से असामान्य रूप से अधिक है, तो यह किडनी रोग का संकेत हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप पेशाब में झाग बनने लगती है। इसके अलावा यह टेस्ट परिणाम गुर्दे संबंधी चोट का संकेत भी दे सकता है, क्योंकि इससे भी फिल्टर करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और पेशाब में झाग बनने लगती है।

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