दीपक रात के अंधेरे में लौट रहा था और फिर वह कुख्यात श्मशान घाट के पास पंहुचा फिर…

यह उन दिनों की बात है जब दीपक शादी के लिए अपने रिश्तेदारों के पास गया था। दीपक की पत्नी और बच्चे भी उसके साथ थे। सभी लोग बहुत खुश थे। आखिरकार बारात के दिन आ गया , सभी ने बारात में खूब मस्ती की।

खाना खाते काफि देर हो चुकी देर थी। अब बच्चे भी नींद में थे। फिर दीपक ने सभी को गाड़ी पर बिठाया और रात को वापसी के लिए निकल गए। अंधेरा था और रात में सड़क पूरी तरह से खाली थी।

दीपक अकेला जाग रहा था और बाकी सब सो रहे थे। अचानक कार को कुछ होने लगा और वह रुक-रुक कर चलने लगी। और फिर कार रुक गई और नहीं चल रही थी। जब दीपक ने देखा तो सामने वही कब्रिस्तान था जिसकी कहानी काफी प्रसिद्ध थी।

दीपक थोड़ा डर गया लेकिन उसने हिम्मत की और बाहर जाकर कार को चेक किया, फिर कार स्टार्ट करने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद दीपक को लगा जैसे कोई उसके बगल में खड़ा है। जब दीपक ने मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था।

अचानक उसे बच्चे के रोने की आवाज आने लगी। जब दीपक ने अंदर देखा तो सब सो रहे थे। अब दीपक बहुत डर गया था। वह किसी तरह वहां से निकलना चाहता था। उसने किसी तरह गाड़ी स्टार्ट की। और उस कब्रिस्तान से आगे बढ़ा। अब दीपक को थोड़ा सुकून मिला कि वह उस कब्रिस्तान से दूर आ गया है और फिर कुछ देर बाद वह घर पहुँच गया। मगर जैसे ही वह गाड़ी से नीचे उतरा तो उससे अजीब सा लगने लगा मानो उसे ऐसा लग रहा था की उनके साथ कोई और भी आ गया है।

वे सभी घर के अंदर आ गए। और अपने अपने कमरे में सोने चले गए। दीपक को नींद नहीं आ रही थी। उसे बार-बार वही कब्रिस्तान याद आ रहा था। अचानक उसे फिर से बच्चे का रोना सुनाई दिया। दीपक उठा और बच्चों के कमरे में गया और वह चौंक गया।

उसे बच्चों के बिस्तर के पास एक छाया दिखाई देती है जो बच्चों की ओर देख रही है। दीपक बहुत डर गया था। उसने बच्चों से जाकर पूछा की वे डरे तो नहीं। तो उन्हें कुछ भी पता नहीं था।

जब सुबह हुई, तो उसके बच्चों में से एक ने बताया कि जब वह कल रात उठा, तो उसके सामने एक महिला कार के पास आई। और उसने उसे एक लॉकेट दिया।तब दीपक ने महसूस किया कि छाया वास्तव में उस लॉकेट के कारण आई थी। और वह छाया एक चुड़ैल थी। वह तुरंत उस लॉकेट को उठाकर मंदिर में ले गया और उसे उस कब्रिस्तान में दफना दिया और वहां से लौट आया। फिर दुबारा उसे छाया दिखाई नहीं देती, लेकिन आज भी दीपक उस कब्रिस्तान के पास से रात में नहीं गुजरता।

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