मछली के तेल का सेवन करने से नहीं होता प्रोस्टेट कैंसर

फिश ऑयल (मछली का तेल) और प्रोस्टेट कैंसर (पुरुषों की पौरुष ग्रंथि में होने वाला एक कैंसर) पर कई शोध किए जा चुके हैं। अभी तक सभी का यही मानना था कि ओमेगा 3 फैटी एसिड के अधिक सेवन से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, 17 नवंबर 2019 को सामने आई एक नई स्टडी के अनुसार फिश ऑयल और प्रोस्टेट कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। इस स्टडी के मुताबिक अगर आप काफी समय से फैटी एसिड का सेवन कर रहे हैं तो घबराने की बात नहीं है। फिश ऑयल में मौजूद फैटी एसिड हमारे शरीर और मस्तिष्क को कई तरह से लाभ पहुंचाता है जैसे – चिंता और डिप्रेशन को कम करना, इससे हृदय रोग होने का जोखिम भी कम हो जाता है।

इंटरमाउंटेन हेल्थकेयर हार्ट इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता और चिकित्सक सहायक, विएट टी. ली ने कहा, अगर मैं अपने किसी मरीज को हृदय के लिए ओमेगा 3 लेने की सलाह देता हूं तो इस बात को निश्चित करना चाहूंगा कि मैं कहीं उसे प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम में तो नहीं डाल रहा। इसके आगे डॉ ली ने कहा, हमारे शोध में ओमेगा 3 और प्रोस्टेट कैंसर के बीच किसी भी संबंध के सबूत नहीं पाए गए हैं।

इसके अलावा बोस्टन के हावर्ड मेडिकल स्कूल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ फ्रांसिन वेल्टी और उनके साथी डॉ भव्य वेमुरी ने भी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में 12 नवंबर 2019 को फिश ऑयल और प्रोस्टेट कैंसर के बीच का संबंध बताया। इस स्टडी में कोरोनरी आर्टरी रोग से ग्रस्त 250 लोगों को शामिल किया गया। 30 महीनों के लिए आधे लोगों ने ओमेगा 3 सप्लीमेंट्स का सेवन किया तो अन्य लोगों को ऐसा करने से मना किया गया, जिसे कंट्रोल ग्रुप कहा गया। कंट्रोल ग्रुप के मुकाबले ओमेगा 3 का सेवन कर रहे लोगों में बेहतर सामंजस्य, फूर्ती और याददाश्त में सुधार देखा गया। इन्हें फॉलोअप के लिए 1 साल और 30 महीने बाद बुलाया गया था।

ओमेगा 3 फैटी एसिड पूरे शरीर में कोशिकाओं की झिल्लियां बनाने में मदद करते हैं और हृदय के कार्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शरीर को इनकी जरूरत तो होती है, लेकिन यह इन्हें खुद नहीं बना पाता है। शरीर में ओमेगा 3 की कमी को पूरा करने के लिए आपको अपने आहार में मछली, सब्जियां, तेल, बादाम, अलसी का तेल और हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात की सलाह देते हैं कि इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

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