सोते समय लार टपकने का कारण ?

खाने को निगलने के लिए मुंह में लार का पर्याप्त मात्रा में बनना बहुत जरूरी है। लेकिन जब यही लार बहुत अधिक मात्रा में बनकर अनियंत्रित रूप से मुंह से बाहर निकलने लगे तो यह समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। ड्रूलिंग की समस्या मुख्यरूप से सोते समय होती है। इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं, जिसपर आपको ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।

किसी भी उम्र में अनियंत्रित ड्रूलिंग जो भोजन निगलने की क्रिया को प्रभावित करता हो।
चार साल तक की आयु के बच्चों में ड्रूलिंग एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, अगर बड़े बच्चों और युवाओं को यह दिक्कत आती है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
जीभ पर नियंत्रण न होना।
अत्यधिक मात्रा में लार का निकलना, जिससे कपड़े खराब होते हों।
अगर आपमें उपरोक्त में से एक या उससे अधिक लक्षण देखने को मिलते हैं, तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

सोते समय लार टपकने का कारण?-
हमारा शरीर अमूमन एक दिन में लगभग 1 लीटर से अधिक लार बनाता है। लार ग्रंथियां लार बनाती हैं, जिसे हम निगल लेते हैं और यह रक्त वाहिकाओं की मदद से फिर से संचारित होने लगती है। कुछ लोगों को मुंह खोलकर सोने की आदत होती है, जिस वजह से लार मुंह से बाहर निकल जाती है। दरअसल, नींद के समय शरीर आराम की स्थिति में होता है और ऐसे में कुछ व्यक्ति मुंह खोलकर सोते हैं, जिससे लार मुंह से बाहर गिरने लगती है। कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आपके सोने के तरीके की वजह से भी मुंह से लार टपक सकती है। यदि आप एक ओर करवट लेकर सोते हैं तो लार अंदर जाने की बजाय बाहर की ओर निकलती है। आगे जानते हैं कि सोते वक्‍त लार टपकने के क्‍या कारण हो सकते हैं, साथ ही यह किन बीमारियों की ओर संकेत करता है।

उम्र

मुंह से लार गिरने की समस्या मुख्यरूप से नवजातों में देखने को मिलती है। तीन से छह माह की आयु के दौरान यह आपको ज्यादा देखने को मिल सकती है। बच्चों में चूंकि इस दौरान दांत निकलने शुरू होते हैं ऐसे में इसे सामान्य माना जा सकता है। हां, जिन युवाओं और अधिक उम्र वाले लोगों को अक्सर इस तरह की दिक्कतें आ रही हों उन्हें डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खानपान

खाने में अम्लीय सामग्री का सेवन करने से ज्यादा मात्रा में लार का उत्पादन होता है। इससे सोते वक्त मुंह से लार गिरने की समस्या आ सकती है।

दवाओं के साइड इफेक्ट

कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी आपको ड्रूलिंग की दिक्कत आ सकती है। अल्जाइमर का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एंटीसाइकोटिक दवाओं के कारण भी आपको अत्यधिक ड्रूलिंग की समस्या आ सकती है। कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के कारण भी मुंह से बहुत अधिक लार आ सकता है।

कुछ भी निगलने में आ रही समस्या

निगलने में आ रही कठिनाई को ‘डिस्फेगिया’ के नाम से जाना जाता है। यदि आपको ड्रूलिंग की बहुत ज्यादा शिकायत रहती है तो संभव है यह किसी बीमारी का संकेत हो। पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और यहां तक कि कई प्रकार के कैंसर के चलते भी डिस्फेगिया हो सकता है। इस दौरान आपको थूक तक को निगलने में कठिनाई हो सकती है।

स्लीप एपनिया

रात को सोते समय लार टपकना स्लीप एपनिया (इसमें सोते समय सांस रुकने और बार-बार करवटें बदलने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं) की ओर इशारा कर सकता है। स्लीप एपनिया में लार टपकना जोखिम भरा होता है। यदि इसका समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। स्लीप एपनीया होने पर लार टपकने के अलावा जोर से खर्राटे आना, गहरी नींद से अचानक उठ जाना, दिनभर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आना, नींद से उठने पर सुस्ती महसूस करना, नींद से उठने पर गले में खराश या गले का सूखना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

टॉन्सिलाइटिस

अगर गले में खराश या टॉन्सिल होने की वजह से आपको निगलने में दिक्कत आ रही है तो यह गले में सूजन का संकेत हो सकता है। गले में सूजन वायरल या बैक्टीरियल कारणों से हो सकती है। यह समस्या होने पर गले में लाल और सफेद दाग (पैच) पड़ने लगते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति को बुखार भी आ सकता है। टॉन्सिल होने की वजह से निगलने में दिक्कत आती है। जब लार को निगला नहीं जाता है तो नींद के दौरान वह मुंह से निकलने लगती है। हालांकि, सिर्फ मुंह से लार निकलने की वजह से आप यह नहीं कह सकते हैं कि आपको टॉन्सिलाइटिस है। इसके अन्य लक्षणों पर भी गौर करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें।

श्वसन संक्रमण

सर्दी-जुकाम, एलर्जी या नाक से संबंधित अन्‍य समस्‍याओं की वजह से साइनस (नाक के आसपास हवा से भरी छोटी-छोटी संरचनाएं) में सूजन हो सकती है। साइनस में सूजन या संक्रमण होने पर इसमें ब्‍लॉकेज और स्राव हो सकता है। ये स्राव लार के रूप में भी मुंह से बाहर आ सकता है।

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