अकबर – बीरबल की कहानी रेत से चीनी अलग करना, मजेदार कहानी

एक बार की बात है अकबर , बीरबल और सभी मंत्रिमंडल दरबार में बैठे थे और बारी – बारी सभी राज्य के लोगो का समस्या का समाधान कर रहे थे। तभी एक आदमी एक बर्तन लेके दरबार में आ गया , उस बर्तन के अंदर रेत और चीनी का मिश्रण था। वो आदमी महाराज अकबर को कहते है की महराज मै बीरबल की बुद्धिमानी का बोहोत चर्चा सुना है तो मै उनके बुद्धिमती का परीक्षा लेना चाहता हु। मै चाहता हु की बीरबल जी इस बर्तन का चीनी और रेत को अलग -अलग कर दे वो भी बिना पानी मिलाये।

उस आदमी की बात सुन के बीरबल कहते है , महाराज ये तो मेरे बाए हाथ का काम है और फिर महराज से इसको करने का आदेश मांगे और फिर वो चीनी और रेत का बर्तन लेके बाग़ की तरफ चले गए और एक आम के पेड़ के निचे वो रेत और चीनी के मिश्रण को ढाल दिए। ये सब देख के वो आदमी बीरबल से पूछने लगा की ये क्या कर रहे है वो , फिर बीरबल उसको कहे की आपको इसका जवाब कल मिलेगा और वह से सब चले गए।

दूसरे दिन जब दरबार लगा तो महाराज अकबर , बीरबल , सभी मंत्रिमंडल और वो आदमी उस आम के पेड़ के नीचे चले गए और सभी ने देखा की चीटिया सभी चीनी को वहा से उठा के अपने बिल में ले जा रहा था और थोड़े देर में पूरा चीनी का टुकड़ा वहा से अलग हो गया और वह पर बस रेत बचा। फिर बीरबल ने कहा , महाराज देखिए मैंने चीनी और रेत को अलग कर दिया , फिर उस आदमी ने कहा की चीनी कहा गया तो बीरबल ने कहा चीनी तो चीटियों के बिल में है अगर आपको चीनी चाहिए तो बिल में जाके चीनी निकाल लो , ये सुन के सभी लोग हॅसने लगे और एक बार फिर दरबार में सभी लोग बीरबल की बुद्धिमानी की सभी ने प्रसंसा किया।

कहानी से सिख – इस कहानी से हमें ये सिख मिलता है की कभी भी किसी को छोटा देखाने की कोसिस नहीं करना चाहिए

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