फर्जी जीएसटी क्लेम पर अब कार्रवाई होगी, आइए जानिए

शिशु व जीएसटी की चोरी करने वालों पर नकेल कसने के उद्देश्य से दोनों विभागों के आंकड़ों को एक दूसरे के साथ साझा किया जाएगा। जारी से जुड़े ऑफिसर ने हिन्दुस्तान को बताया है

कि इस पहल से न सिर्फ कर विभाग की कमाई बढ़ेगी बल्कि जीएसटी में फर्जी इनपुट कर क्रेडिट वसूलने वालों पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। हिन्दुस्तान को मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) व केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड सीबीआईसी के बीच हुई नई साझेदारी के बाद से करदाताओं को जारी किए जाने वाले फॉर्म 26 एएस में उनके जीएसटी रिटर्न से जुड़ी जानकारी भी शामिल रहती हैं ।

सूत्रों के मुताबिक विभाग को जाँच के दौरान ऐसे कई मुद्दे मिले हैं जिनमें लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न में बेहद कम रकम भरी है लेकिन GST रिटर्न की बदलाव की कमाई को ज्यादा दिखाती हैं। यही कारण है कि अब कर विभाग ऐसे लोगों को उन पर बनने वाले कर की सारी जानकारी फार्म 26 एएस के जरिये दे दिया जाएगा ताकि विभाग का ऐसे मामलों को निपटाने में लगने वाला समय भी बचे व लोगों को भी कर देने में सरलता हो।

फर्जी जीएसटी क्लेम पर भी सख्ती

यही नहीं फर्जी जीएसटी क्लेम लेने वालों से परेशान विभाग को भी इस नई व्यवस्था से मदद मिलेगी। पिछले सप्ताह ही फर्जी एक्सपोर्टर्स की ओर से लगभग 2000 करोड़ रुपये का इनपुट कर क्रेडिट क्लेम करने का मुद्दा सामने आया था। विभाग की जाँच में दिए गए एड्रैस पर कोई भी व्यवसाय नहीं मिला। विभाग का मानना ​​है कि नई व्यवस्था से दोनों विभागों के पास करदाताओं का एक बड़ा डेटाबेस जिससे फर्जी जीएसटी रिफंड व कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी।

कैसे कार्य करेगा सिस्टम?

इस व्यवस्था में कारोबारियों का GST व इनकम टैक्स रिटर्न तकनीक के जरिए मैच कराया जाएगा। यही नहीं कंपनियों के वित्तीय बदलाव, उनका टर्नओवर जैसी चीजें सिस्टम में एक साथ दिखेंगे। अभी तक मांगने पर ही इन आंकड़ों की उपलब्धता बनी हुई थी, लेकिन अब रियल टाईम अटारी डेटा दोनों विभागों के पास होगा। डेटा एनालिटिक्स के जरिए विभाग रिटर्न की मैचिंग करेगा। गड़बड़ी दिखने पर दोनों विभाग के पास रेड फ्लैग की जानकारी के साथ समीक्षा पहुंच जाएंगे। ऐसे में चोरी के ट्वीट से जीएसटीएन के पास तत्काल जीएसटी रिफंड रोकने में मदद मिलेगी।

सीबीआईसी व सीबीडीटी के बीच करार

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानि सीबीडीटी व केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड सीबीआईसी ने मंगलवार को एक सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दोनों संगठनों के बीच डेटा का सहज आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है। नए समझौते में डेटा के नियमित इंटरैक्शन-प्रदान के साथ साथ सीबीडीटी और सीबीआईसी भेजें किए जाने पर तत्काल अपने संबंधित डेटाबेस में उपलब्ध ऐसी किसी जानकारी का भी एक-दूसरे के साथ बातचीत-प्रदान करेंगे, जिसकी उपयोगिता दूसरे संगठन के लिए हो सकती है।

सीबीडीटी के अध्यक्ष प्रमोद चंद्र मोदी और सीबीआईसी के अध्यक्ष एम। अजीत कुमार ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। दोनों संगठन पहले से ही विभिन्न मौजूदा व्यवस्थाओं के माध्यम से आपस में योगदान कर रहे थे। इस पुरस्कार के लिए एक आदान डेटा इंटरैक्शन-प्रदान संचालन समूह ‘का भी गठन किया गया है, जो डेटा इंटरैक्शन-प्रदान की स्थिति की समीक्षा करने और डेटा साझाकरण व्यवस्था की प्रभावशीलता को व बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर मिलने को भी करेगा।

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