एक ऐसा गांव जहाँ हनुमान जी की पूजा नहीं होती

आप जानते हैं हनुमान जी संजीवनी कहाँ से लाए थे? ये तो आपने सुना होगा कि वे हिमालय से लाए थे और पूरा पहाड़ ही उखाड़ लाए थे। बजरंगबली शक्ति के देवता माने जाते हैं और तुलसीदास की रामायण के अनुसार तो वो कलयुग में भी जीवित रहेंगे और भक्तों पर कृपा बरसाएंगे। हनुमानजी के बारे में ये सारी बातें उन्हें भक्तों का प्रिय बनाती है।

बहुत कम लोग जानते है कि हमारे ही देश में एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है, यहां तक कि वहां हनुमानजी का कोई मंदिर तक नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के रहनेवाले हनुमान जी से आज तक नाराज़ हैं।

इस गाँव का नाम है द्रोणागिरी – द्रोणागिरि गांव उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ प्रखण्ड में जोशीमठ नीति मार्ग पर है। यह गांव लगभग 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां के लोगों का मानना है कि हनुमानजी जिस पर्वत को संजीवनी बूटी के लिए उठाकर ले गए थे, वह यहीं स्थित था।

चूंकि द्रोणागिरि के लोग उस पर्वत की पूजा करते थे, इसलिए वे हनुमानजी द्वारा पर्वत उठाकर ले जाने से नाराज हो गए। यही कारण है कि आज भी यहां हनुमानजी की पूजा नहीं होती। यहां तक कि इस गांव में लाल रंग का झंडा लगाने पर भी पाबंदी है। गाँव वालों का मानना है कि संजीवनी के साथ हनुमान जी जो पहाड़ उखाड़ ले गए, वह असल में उनके पर्वत देवता की एक भुजा थी. इसलिए गाँव के लोग आज तक हनुमान जी से नाराज़ हैं।  

मज़ेदार बात ये है कि यहां जो रामलीला भी होती है उसमें से हनुमान जी का पूरा प्रसंग ही ग़ायब कर दिया जाता है और इसमें हनुमान जी का कोई जिक्र नहीं होता है। इस रामलीला में राम जी का जन्म, राम-सीता का विवाह व राम के राज्याभिषेक तक के ही घटनाक्रम को दर्शाया जाता है। न ही गाँव में हनुमान जी का कोई झंडा लगता है, न तस्वीर और न उनकी पूजा होती है।  

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