IPL के वो 3 नियम जिन्हें फुटबॉल लीग से किया गया है चोरी

दुनिया की सबसे अमीर और प्रसिद्ध टी 20 फ्रैंचाइजी लीग आईपीएल को दुनिया भर में पसंद किया जाता है। हर साल आयोजित होने वाली इस लीग का इंतजार भारत के साथ दुनिया भर के खिलाड़ी करते हैं। इतना ही नहीं साल 2008 में शुरू हुआ इस टी 20 लीग में खिलाड़ियों के भाग लेने में आसानी से के लिए आईसीसी सहित ज्यादातर क्रिकेट बोर्ड अपने क्रिकेट कैलेंडर में अलग से समय निकालते हैं। भारत के बाद कई देशों ने उसी की तर्ज पर क्रिकेट लीग की शुरुआत की लेकिन जो पैसा और फेम आईपीएल को मिला वो दुनिया की किसी और क्रिकेट लीग को नहीं मिल गया। भले ही बीसीसीआई की ओर से शुरु की गई यह लीग मौजूदा समय की सबसे प्रसिद्ध लीग हो पर क्या आप जानते हैं कि इस लीग को शुरू करने का आइडिया फुटबॉल से चुराया गया हैं, जिसमें कई सालों से फ्रेंचाइजी लीग खेली जाती रही है।

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वैसे तो फुटबॉल और क्रिकेट में खेली जाने वाली फ्रांचाइजी लीग में काफी अंतर है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारतीय प्रीमियर लीग को आयोजित करने के दौरान जिन नियमों का पालन किया जाता है उनमें से 3 नियम फुटबॉल की फ्रैंचाइजी फाइनल लीग में कॉपी किए गए हैं। । आइये आज आपको उन 3 नियमों के बारे में जानकारी दें:

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फुट से चुराया है फ्रैंचाइजी लीग फॉर्मेट का नियम

वर्ष 2008 में शुरु हुई इस फ्रांचाइजी लीग को शुरु करने के बीच भारत के भगोड़े कारोबारी ललित मोदी का दिमाग रहा, जिसके बदौलत भारतीय क्रिकेट को आईपीएल जैसी अनिश्चितकीमती लीग मिली। हालांकि फ्रांचाइजी लीग क्रिकेट से काफी समय पहले से फुटबॉल में खेली जाती रही है।

फुटबॉल लीग में भी जमकर पैसा बरता है। आईपीएल को शुरू करने का काडिया यहीं से चोरी किया गया है। भारत में आईपीएल ने सफलता के एक नए आयाम रचे और कई स्टार खिलाड़ी बनाए जिन्हें इस मंच के जरिये नाम और पहचान मिली।

इसके अलावा हर साल आईपीएल में होने वाले खिलाड़ियों की नीलामी के दौरान भी फ्रेंचाइजी टीमें अच्छी खासी रकम चार्ज करके बड़े-बड़े खिलाड़ियों को अपने खेमे में जोड़ती हैं। इसके जरिये खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स मिलते हैं। ऐसा नहीं है कि फ्रैंचाइजी बड़े खिलाड़ियों पर ही पैसे लगाती हैं बल्कि युवा खिलाड़ी भी इसमें अच्छे-अच्छे कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल कर रातों-रात करोड़पति बन जाते हैं।

सेमीफाइनल के बजाय प्लेऑफ बनाने का नियम

2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी तो उस समय के प्रारूप और मौजूदा फॉर्मेट में काफी अंतर आ चुका है। शुरुआत में यह लीग आईसीसी के किसी भी आम टूर्नामेंट की तरह सेमीफाइनल वाले फॉर्मेट में खेली जाती थी जिसमें नॉकआउट में शामिल होते थे। हालांकि आगे चलकर आईपीएल ने फुटबॉल से एक और आइडिया चुरा लिया।

साल 2011 में आईपीएल में प्ले ऑफ फॉर्मेट की शुरुआत की गई जिसने इस टूर्नामेंट को और भी मजेदार बना दिया। इस फॉर्मेंट के तहत कुल 4 टीमें नॉकआउट राउंड में पहुंचती हैं। जहां से टेबल में पहले स्थान पर काबिज टीम दूसरे नंबर वाली टीम के साथ प्लेऑफ खेलती है जबकि 3 और 4 नंबर की टीम क्वॉलिफायर में दम दिखाती है।

क्वालिफॉयर में जीत हासिल करने वाली टीम को प्लेऑफ 1 में हारने वाली टीम के साथ दूसरा प्लेऑफ खेलना पड़ता है और जीतने वाली टीम फाइनल का सफर करती है। इसके बाद फफाइनल मुकाबला खेला जाता है। यह केवल प्ले ऑफ फॉर्मेट कहा जाता है।

यूं तो आईपीएल ने पहले सीजन में ही अपने लाखों फैन मेट लिए थे लेकिन प्लेऑफ फॉर्मेट के आने के बाद से यह लीग फैन्स के बीच और भी मशहूर हो गए और मौजूदा समय में फैन्स इसकी बेसब्री से इंतजार करते हैं।

घरेलू मैदान पर रिजर्व मैच और बाहर खेलने का नियम

आईपीएल में मौजूदा समय में भारत की 8 घरेलू फ्रैंचाइजी टीमें लीग का हिस्सा बनती है। एक सीजन के दौरान हर टीम नॉकआउट मुकाबलों से पहले लगभग 14 मैच खेलती है जिसमें उसे हर टीम के साथ 2 मुकाबले खेलने हैं। इसमें खेले गए हर थान के लिए प्रत्येक टीम के पास उसका एक घर और एक अवे ग्राउंड होता है। इसके अनुसार हर टीम को लगभग 7 मैच अपने होम स्टेडियम में खेलने होते हैं और बाकी के 7 मैच अलग-अलग फ्रेंचाइजी टीमों के स्टेडियम जिन्हें अवे कहा जाता है।

आईपीएल में यह शुरुआत से होता हुआ आ रहा है, जिसमें जो भी टीम प्वॉइंट्स टेबल पर टॉप -4 में रहता है वह प्लेऑफ के लिए क्वालिफाई करती है। इसके अलावा टीमों में होम अवे जर्सी का चलन भी देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर की टीम जब अपने होम ग्राउंड यानिचिनास्वामी क्रिकेट स्टेडियम में खेलती है तो ग्रीन कलर की जर्सी में नजर आती है।

गौरतलब है कि आईपीएल में दिखाई देने वाला यह पैदल फुटबॉल की फ्रांचाइजी लीग से कॉपी किया गया है। मूल रूप से होम ग्राउंड पर खेलने से घरेलू टीम को परिस्थितियों का एडवाटर मिलता है। इसलिए एक मैच होम ग्राउंड और एक अवे ग्राउंड पर खेलाया जाता है, ताकि सभी टीमों को बराबर तरीके से फायदा मिल सके।

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