1 दिन में अधिकतम कितनी बार चाय पीनी चाहिए?

हमें चाय पीने की जरूरत ही नहीं है। चाय हमें सिर्फ नुकसान ही कर रही है।

जैसा की हम जानते है की चाय हमारे देश का उत्पादन नही है. जब अंग्रेज भारत में आये थे, अपने साथ वह चाय के पोधे लाये थे और जहाँ जहाँ उनको पहाड़ी ठंडा इलाका लगा वहां-वहां उन्होंने उन पौधों को लगा दिया. 1750 सन से पहले हमारे भारत में चाय का नामो-निशान नही था. चाय एक प्रकार की मेडिसिन है लेकिन सिर्फ उन लोगो के लिए ब्लड प्रेशर लो रहता है. लेकिन जिनका ब्लड प्रेशर नार्मल या हाई रहता है, चाय उनके लिए ज़हर के सामान है.

ब्रितिशियन, अमरेकी, जर्मन, स्वीडिश लोगो का ब्लड प्रेशर अक्सर लो रहता है. उनको चाय की हमेशा जरूरत रहती है. क्यों की उनके देशो में ठण्ड ज्यादा रहती है. उनकी ठण्ड का हम सोच भी नही सकते. और अगर हम उन लोगो का तापमान देखे तो वह माइनस 40 तक भी पहुँच जाता है और कई बार तो इससे भी कम. ये तापमान उनके यहाँ 6 महीने तो धुंद ही रहती है क्यों की सूरज वहां निकलता ही नही है. जहा ठण्ड बहुत होती है, वहा के लोगो का ब्लड प्रेशर बहुत लो होता है.

तो बस ये बात ध्यान में रखिये कि अगर आपको ब्लड प्रेशर नार्मल रखना है दवाई पर निर्भर नही रहना है तो आप चाय का परहेज़ कीजिये. क्योंकि हम लोग गर्म देश के निवासी हैं. अगर हम अंग्रेजो के खून की एसिडिटी और हमारे खून की एसिडिटी मापे तो बहुत ज्यादा अंतर होगा. हम सबके ph में भी बहुत ज्यादा अंतर रहता है. तो इसलिए चाय और कॉफ़ी जैसी गर्म चीज़ें उन लोगो के लिए ही ठीक है जो ठण्ड से मर रहे हो. वरना ये हमारे लिए ज़हर सिद्ध हो सकती हैं.

चाय कैसे छोड़े >>

आप चाय कॉफी छोड़िए फिर आप पूछेंगे कैसे छूटेगा. आपको एक तरीका बताता हूँ जिससे चाय पी कर जो नुकसान आपने किया है उसकी भरपाई भी हो जाएगी और चाय भी छूट जाएगा. चाय पीकर आपने आपने पेट को एसिडिटी मना लिया, जिसकी सबसे अच्छी चीज है अर्जुन छाल का पाउडर उसका काढ़ा बनाकर पीजिए चाय जिनको छोड़नी है सबसे अच्छी दवा है अर्जुन छाल कहीं भी मिलती है. ये चिकित्सा केन्द्रों पर भी मिलता है. वहां से ले लीजिए उसको काढा बनाइए काढा बनाना आप सब जानते हैं. पानी में डालकर उबाल दीजिए थोड़ा उसमें चाहे तो शक्कर मिला दीजिए. बहुत अच्छा तैयार होता है टेस्ट उसका चाय के जैसा ही है. और रंग भी चाय के जैसा ही है उसमें दूध भी डाल सकते हैं. गुड डालकर और उसको पी लीजिए लगातार 15 20 दिन अगर आपने पी लिया तो मैं आपको 99% गारंटी देता हूं चाय छूट जाएगी और चाय पीकर जितना आपने नुकसान कर लिया वह सारा नुकसान इससे कवर हो जाएगा आपके ब्लड के एसिडिटी को कम कर देगा और आपके ब्लड को एल्केलाइन कर देगा.

अगर रिश्तेदार आते हैं रिलेटिव जाते हैं उसको आप कहते हैं अतिथि तो देवता है देवताओं को तो जहर नहीं पिला सकते देवताओं को तो अमृत ही पिला सकते हैं. राक्षसों को जहर पिला सकते हैं तो आप देख लीजिए आपके अतिथि राक्षस है या देवता हैं अगर आप मानते हैं कि वह राक्षस है तो खूब चाय पिलाइए खूब कॉफी पिलाइए जल्दी मार डालना है उनको अगर आप मानते हैं कि वह देवता हैं तो बिल्कुल चाय मत दीजिए बिल्कुल कॉफी मत दीजिए उनको अर्जुन की छाल का पाउडर दीजिए.

मैं एक आखरी जानकारी आपको दे दूं भगवान ने जो चीजें आपके नजदीक में पैदा की है वही आपके खाने पीने के लिए अच्छी है जो चीजें हजारों मिल आपसे दूर पैदा होती है वह आपके लिए अच्छी नहीं है आपके खाने चीजें की जो भी चीजें होती है वह ५० किलोमीटर के दायरे में उत्पन्न होती है आप अपने एरिया को केंद्र बनाकर ५०किमी का एक फेस बना दीजिए आपके जरूरत की हर चीज वहां होती है जो आपके लिए सबसे अच्छी है और हजारों मील दूर नीलगिरी की पहाड़ियों में जो चाय होती है कर्नाटक के पूर्व एरिया में जो कॉफी होती है वह आपके लिए उचित नहीं है क्योंकि हर वस्तु आबोहवा के हिसाब से होती है.

आप अपने एरिया के आसपास के क्षेत्र में कितना भी चाय का प्लांटेशन करेंगे होगा ही नहीं क्योंकि चाय की हमें जरूरत नहीं है.गड़बड़ी क्या हो गई कि ट्रांसपोर्टेशन के साधन इतने हो गए कि जहां भी जो कुछ होता है हम उसको हासिल कर लेते हैं लेकिन वह शरीर के अनुकूल नहीं है।

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