हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को मेजर क्यों कहा जाता था,जानिए क्यों

आज बात करने वाले हैं स्पोर्ट्स की दुनिया के बारे में। दोस्तों आप सभी ने तो मेजर ध्यानचंद का नाम तो सुना ही होगा। आज हम इन्हीं खास शख्स के बारे में बात करने वाले हैं। मेजर ध्यानचंद हॉकी के बहुत बड़े खिलाड़ी थे। उनके सामने किसी भी खिलाड़ियों की चलती नहीं थी।

मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रह चुके हैं। मेजर ध्यानचंद तो पूरी दुनिया सबसे श्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ियों मे से एक मानते हैं। दोस्तों मेजर ध्यानचंद का जन्म 19 अगस्त 2005 को हुआ था। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था जो अभी प्रयागराज नाम से जाना जाता है। जब वो मैदान में खेलने को उतरते थे तो गेंद मानों उनकी हॉकी स्टिक से चिपक सी जाती थी। उन्हें 1956 में भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

इसके अलावा बहुत से संगठन और प्रसिद्ध लोग समय-समय पर उन्हे ‘भारतरत्न’ से सम्मानित करने की माँग करते रहे हैं किन्तु अब केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने से उन्हे यह सम्मान प्रदान किये जाने की सम्भावना बहुत बढ़ गयी है।दोस्तों मेजर ध्यानचंद की मृत्यु 5 दिसंबर 1979 को दिल्ली में हुआ था। लगभग 74 साल की जिंदगी में इन्होंने बड़े बड़े काम किया और बहुत सी मेडल जीतें।

जब द्वितीय महायुद्ध प्रारंभ हुआ तो सन्‌ 1943 ई. में ‘लेफ्टिनेंट’ नियुक्त हुए और भारत के स्वतंत्र होने पर सन्‌ 1948 ई. में कप्तान बना दिए गए। केवल हॉकी के खेल के कारण ही सेना में उनकी पदोन्नति होती गई। 1938 में उन्हें ‘वायसराय का कमीशन’ मिला और वे सूबेदार बन गए। उसके बाद एक के बाद एक दूसरे सूबेदार, लेफ्टीनेंट और कैप्टन बनते चले गए। बाद में उन्हें मेजर बना दिया गया। इसीलिए उन्हें मेजर के नाम से जाना जाता है।

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