हमेशा स्वस्थ और निरोगी रहना चाहते है, तो अपनाए आयुर्वेदिक दिनचर्या

आज हम आपको हमारे प्राचीन आयुर्वेदिक के ग्रन्थ “चरक संहिता”

और ” अष्टांग हृदय ” के दूसरे अध्याय ( दिनचर्या ) मे यह बताया गया है कि स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए हमारी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए।

तो चलिए जानते है कि आयुर्वेद मे दिनचर्या का वर्णन कैसे किया गया है।

1) भ्रममुहूर्त पर हमें उठना चाहिए।

भ्रममुहूर्त का समय सुबह 4 से 5 बजे के बीच होता है। कोशिश करे कि आप सुबह 4 से 4.30 बजे था उठ जाए। क्योकि इस समय आपके शरीर मे ( वात दोष ) बढ़ जाता है जो आपके शरीर को दिन भर के काम करने मे मदद करता है।

भ्रममुहूर्त को ज्ञान प्राप्त करने का समय भी बताया गया है। इस समय को पढ़ा हुआ हमे ज्यादातर देर तक याद रहता है।

2) भ्रममुहूर्त मे उठने के बाद आपको अपना पेट साफ कर लेना चाहिए। क्योकि इस समय मे आपके शरीर का वात दोष बढ़ा होता है जिससे आपको कॉन्स्टिपेशन अथवा मल अवरोध जैसी समस्या का सामना नहीं करना होगा।

3) व्यायाम करे।

अपना पेट साफ होने के बाद बारी आती है व्ययाम करने की। पर आपके दिमाग़ मे यह सवाल भी आ रहा होगा कि कितनी देर व्ययाम करे?

हमारे आयुर्वेदिक ग्रन्थ मे इसका भी हल दिया है।

आपको ” अर्धशक्ति ” व्ययाम करना है। अर्धशक्ति का मतलब आपको अपनी क्षमता से आधा व्ययाम करना है।

उदाहरण के लिए, जैसे आपमे अगर 50 डिप्स मारने की क्षमता है तो आपको केवल 25 डिप्स ही लगाने है।

अब प्रश्न यह भी आता है कि हमें कैसे पता चलेगा की हमने अर्धशक्ति तक व्ययाम कर लिया है?

तो इसके यह बताया गया है कि आपको व्ययाम तब तक करना है ज़ब तक आपके माथे पर पसीना नहीं आ जाता। या आप मुँह से सास लेना नहीं शुरू करते, तब तक आपको व्ययाम करना है।

4) स्नान।

योगा अथवा व्ययाम के आधे घंटे के बाद हमें स्नान करना चाहिए।

अब सवाल आता है कि हमें नहाते वक्त ठंडा पानी लेना चाहिए या गर्म?

आयुर्वेद मे बताया गया है कि हमें अपने कंधे के नीचे से गर्म पानी का प्रयोग करना चाहिए।

और कंधे के ऊपर से मतलब सिर पर ठंडा पानी का प्रयोग करना चाहिए। क्योकि गर्म पानी हमरे आँखो और सिर के बालो के लिए नुकसान दायक होता है।

ज्यादा गर्म पानी के प्रयोग से हमारी आँखो की नजरें कमजोर हो सकती है।

तो आप इस बात का ध्यान रखे कि नहाते समय सिर पर ठन्डे पानी का प्रयोग करे और कंधे के नीचे गर्म पानी का।

5) मेडिटेट / ध्यान लगाना।

जिस प्रकार हमरे शरीर को व्ययाम की जरुरत होती है। उसी प्रकार हमारे दिमाग़ को भी व्ययाम की जरुरत होती है। इससे दिन भर हमारा दिमाग़ एक्टिव रहेगा और उसके कार्य करने की क्षमता भी बढ़ जाएगी।

आप इसको भगवान की पूजा मे ध्यान लगा कर भी कर सकते है।

ऐसा करने से आपके अंदर एक सकारात्मक शक्ति का निर्माण होगा और आपका पूरा दिन सकारात्मक ही जाएगा।

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